रायपुर । (सियासत दर्पण न्यूज़) कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTUJM) बॉयस हॉस्टल की हालत बद से बदतर होती जा रही है। शहर से दूर होने के कारण विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के पास दूसरी जगह शिफ्ट होने का विकल्प भी नहीं है।
दूर-दराज जिलों से पढ़ाई के लिए आए छात्र हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं। हॉस्टल बुनियादी सुविधाओं के नाम पर सिर्फ एक ढांचा भर रह गया है। कमरों से लेकर बाथरूम, पानी, परिसर और सुरक्षा—हर स्तर पर हालात चिंताजनक हैं।
KTU के बॉयस हॉस्टल में 30 से ज्यादा कमरे हैं। इनमें से सिर्फ 6-8 ही रहने लायक हैं। अधिकांश कमरों की खिड़कियां टूट चुकी हैं। दीवारों पर सीरन और काई जम चुकी है, जो नमी और लंबे समय से मरम्मत न होने की गवाही दे रही है। कई कमरों में पेंट पूरी तरह उखड़ चुका है।
जब हमने कमरों को खोला ज्यादातर कमरे गंध से भरे हुए थे। कई कमरों को स्टोर रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति इतनी बुरी है कि हम यहां दो से तीन मिनट से ज्यादा खड़े भी न हो सके। बच्चों ने बताया हॉस्टल में सिर्फ 10-12 बच्चे ही रहते हैं।
छात्रों ने बताया कई दफा हॉस्टल के रिनोवेशन का मुद्दा उठा है, लेकिन कुछ नहीं हाेता। हॉस्टल के स्टेयर्स पर ऊपर बना टीन का शेड पूरी तरह उखड़ चुका है। नतीजा यह है कि बारिश के दौरान कमरों के बाहर पानी भर जाता है और धूप में रहने की जगह तक नहीं बचती। छात्रों का कहना है कि बरसात में कमरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
हॉस्टल के बाहर बना आंगन एक ओर से पूरी तरह धंस चुका है। इस आंगन में कभी बैडमिंटन कोर्ट हुआ करता था। कॉम्पिटिशन होते थे, लेकिन अब ये हादसा स्थल बन गया है। छात्र बताते हैं कई बार रात के समय छात्र दौड़ते-भागते गिर चुके हैं। लेकिन अब तक न तो मरम्मत हुई और न ही किसी तरह की घेराबंदी।
हॉस्टल दो फ्लोर में बना है, लेकिन एक फ्लोर का वाटर फिल्टर लंबे समय से खराब है। छात्रों को मजबूरी में या तो बाहर से पानी लाना पड़ता है या फिर असुरक्षित पानी पीना पड़ता है।
हॉस्टल के आसपास का इलाका पूरी तरह घुटनों तक उगी घास और झाड़ियों से भर चुका है। परिसर किसी जंगल जैसा नजर आता है।
दूर-दराज जिलों से आए छात्र कहते हैं कि उनके पास हॉस्टल के अलावा कोई विकल्प नहीं है। महंगे किराए के कारण वे बाहर कमरा नहीं ले सकते, इसलिए जोखिम उठाकर भी यहीं रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
ये सवाल लगातार उठ रहे हैं, लेकिन जवाब नदारद हैं। हमने भी इन सवालों को KTU एडमिनिस्ट्रेशन के समाने रखा, लेकिन रजिस्ट्रार सुनील शर्मा ने कॉल नहीं उठाया। वहीं हॉस्टल प्रभारी देव सिंह पाटिल ने सवालों के जवाब नही दिए।







