रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र अंतर्गत चौरसिया कॉलोनी में वर्ष 2013 में हुए चर्चित गोलीकांड मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा की अदालत ने आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रुबी सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा।
अभियोजन के अनुसार, फर्नीचर व्यवसायी मोहम्मद हबीब खान को आरोपी ने नवंबर 2012 में अपनी बहन की शादी के लिए करीब 48 हजार रुपए का फर्नीचर बनाने का ऑर्डर दिया गया था। इसमें से 5 हजार रुपए अग्रिम दिए गए थे, जबकि शेष 43 हजार रुपए बकाया थे। फर्नीचर सप्लाई के बाद भी आरोपी की ओर से भुगतान नहीं किया गया, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया।
घटना 13 अगस्त 2013 की है, जब हबीब खान अपने साथियों के साथ बकाया रकम नहीं मिलने पर फर्नीचर वापस लेने आरोपी के बताए पते पर चौरसिया कॉलोनी पहुंचे थे। वहां आरोपी से विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई। अभियोजन का आरोप था कि इसी दौरान आरोपी ने पिस्टल से हबीब खान पर फायर किया, जो उन्हें नहीं लगा। इसके बाद पीछे खड़े नौसाद आलम उर्फ असलम को हबीब का साथी समझकर आरोपी ने गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया के बाद चला ट्रायल
मामले में पुलिस ने देहाती नालसी और मर्ग कायम कर विवेचना शुरू की थी। घटना स्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और आरोपी के कथन के आधार पर पिस्टल और अन्य सामग्री जब्त की गई। जब्त हथियार को रासायनिक और बैलास्टिक परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया और मामला ट्रायल में चला।
अदालत ने साक्ष्यों को पाया अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के साथ सिद्ध नहीं कर पाया। संदेह की स्थिति को देखते हुए अदालत ने आरोपी को लाभ देते हुए सभी धाराओं से बरी कर दिया।
अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने दी जानकारी
इस फैसले की जानकारी देते हुए अभियुक्त की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य न्यायालय में टिक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद यह पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपी को दोषमुक्त करार दिया गया।






