रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम उठाया है। नई नीति के तहत अब राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दोनों दिशाओं में हर 25 किलोमीटर की दूरी पर सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और अन्य ईवी वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। सरकार इसे भविष्य के आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तैयारी के रूप में देख रही है।
हर 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग सुविधा
नई नीति में लंबी दूरी तय करने वाले भारी वाहनों और इलेक्ट्रिक कारों के लिए हर 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए गए हैं। इन स्टेशनों पर बैटरी स्वैपिंग सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, जिससे वाहन चालक कुछ ही मिनटों में बैटरी बदलकर अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्वैपिंग तकनीक से चार्जिंग में लगने वाला समय कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा आसान बनेगी। इससे ईवी वाहनों के उपयोग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
भूमि विकास नियमों में किया गया संशोधन
राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों के तहत अब शहरों, रिहायशी कालोनियों, बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और हाईवे तक ईवी चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार ने पहली बार इन-बिल्डिंग मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग सिस्टम को भी नियमों में शामिल किया है। इससे तकनीकी रूप से आधुनिक चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने में मदद मिलेगी।
होटल, ढाबे और बाजारों में भी मिलेगी चार्जिंग सुविधा
नई व्यवस्था के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, जिला केंद्रों और माल परिवहन परिसरों में भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित परिसरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु स्थान आरक्षित करना जरूरी होगा।
सरकार का मानना है कि यदि चार्जिंग सुविधा घर और कार्यस्थल के आसपास उपलब्ध होगी तो लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएंगे। इससे प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में चार्जिंग प्वाइंट
नई गाइडलाइन के अनुसार बड़े परिसरों और स्टैंडअलोन चार्जिंग स्टेशनों में कुल पार्किंग क्षमता के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आरक्षित रखना होगा। इसी हिस्से में चार्जिंग प्वाइंट विकसित किए जाएंगे। चार्जिंग सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और बिजली मीटरिंग की जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होगी। सरकार का मानना है कि इससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में आधुनिक ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होगा।
पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक परिवहन पर जोर
राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करना है। सरकार का मानना है कि मजबूत चार्जिंग नेटवर्क बनने से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ेगी, प्रदूषण कम होगा और लोगों को ईंधन खर्च में राहत मिलेगी।






