रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आधिकारिक तौर पर एंट्री ले ली है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (सीबीआई) द्वारा कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद अब ईडी ने इस मामले में मनी लाड्रिंग के आरोपितों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बुधवार तड़के ईडी की अलग-अलग टीमों ने रायपुर और भिलाई में एक साथ दबिश दी।
भिलाई, रायपुर, राजनांदगांव में ताबड़तोड़ कार्रवाई
ईडी की जांच टीम सीजीपीएससी के पूर्व सचिव जनक लाल ध्रुव के भिलाई स्थित आवास पर पहुंची। इसके साथ ही रायपुर में आयोग की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के अलावा भिलाई के तालपुरी ए ब्लाक स्थित निवास में पूर्व आइएएस अधिकारी अमृत खलको,राजनांदगांव के शिक्षक नगर स्थित कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भास्कर गणवीर आवास पर दबिश दी। कुछ और अफसरों के ठिकानों पर भी जांच कार्रवाई की खबर सामने आ रही है। अधिकारियों ने पूर्व अफसरों के घरों को सुरक्षा घेरे में लेकर दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की पड़ताल शुरू कर दी है।
वर्ष 2026 में दर्ज इसीआइआर बनी कार्रवाई का आधार
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में हाल ही में (वर्ष 2026 में) एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दर्ज की थी। ईडी की इस कार्रवाई का मुख्य आधार राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू-एसीबी) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और सीबीआई की हालिया जांच रिपोर्ट को बनाया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि भर्ती में हुए इस बड़े हेरफेर के पीछे करोड़ों रुपये के लेन-देन और मनी लाड्रिंग की प्रबल आशंका है।है।
आयोग के अध्यक्ष ने रची साजिश
मामला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और पेपर लीक से जुड़ा है। सीबीआई (CBI) की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। आरोप है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर की मिलीभगत से प्रश्नपत्र लीक किए गए।
कोलकाता की प्रिंटिंग कंपनी से रायपुर आए प्रश्नपत्रों की गोपनीय कॉपियां बनाई गईं और रसूखदारों को बांटी गईं। इसके एवज में एक औद्योगिक समूह द्वारा सीएसआर (CSR) मद के तहत टामन सिंह की पत्नी के एनजीओ को 45 लाख रुपए ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई है। इस धांधली का असर यह हुआ कि CGPSC 2021 के टॉप-20 अभ्यर्थियों में से 13 से अधिक लोग अधिकारियों, नेताओं और करीबियों के रिश्तेदार पाए गए। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।
घोटाले से जुड़ी टाइमलाइन
जनवरी 2021- कोलकाता की प्रिंटिंग कंपनी का कर्मचारी सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर पहुंचा, जहां आंतरिक मिलीभगत से पेपर कॉपी किए गए।
13 फरवरी 2022- सीजीपीएससी 2021 के 171 पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा (Pre) आयोजित हुई, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए।
26-29 मई 2022- मुख्य परीक्षा (Mains) का आयोजन किया गया, जिसमें से 509 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई किया।
11 मई 2023- अंतिम चयन सूची जारी हुई, जिसमें रसूखदारों के रिश्तेदारों के नाम टॉप पर आने के बाद भारी विवाद और विरोध शुरू हुआ।
वर्ष 2024 – 2025-मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। छापेमारी में कई आपत्तिजनक साक्ष्य मिले और चार्जशीट दाखिल की गई।
अब तक हुई गिरफ्तारियां
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में सीबीआई ने आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर पेपर लीक का लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों और उनके मददगारों तक कुल 12 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों को मुख्यतः तीन चरणों में अंजाम दिया गया है।
प्रथम चरण की गिरफ्तारियां – (नवंबर 2024)
टामन सिंह सोनवानी- सीबीआई ने मामले की जांच हाथ में लेते ही सबसे पहले घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं पर हाथ डाला। सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया गया। इन पर अपने पद का दुरुपयोग कर भतीजों और करीबियों को डिप्टी कलेक्टर व डीएसपी बनाने का मुख्य आरोप है।
श्रवण कुमार गोयल: बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर। इन पर आरोप है कि इन्होंने मोटी रकम देकर अपने बेटे और बहू के लिए प्रश्नपत्र हासिल किए थे।
द्वितीय चरण की गिरफ्तारियां (जनवरी 2025)
इस चरण में उन अभ्यर्थियों और सहयोगी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने अनुचित लाभ लिया या उसे प्रोसेस किया।
ललित गनवीर: तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, जिन पर पेपर लीक नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है।
नितेश सोनवानी: पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के भतीजे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
साहिल सोनवानी: पूर्व चेयरमैन के रिश्तेदार (चयनित डिप्टी एसपी)।
शशांक गोयल: उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
भूमिका कटियार (गोयल): श्रवण गोयल की बहू (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
तृतीय चरण की गिरफ्तारियां (सितंबर 2025)
सीबीआई ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए आयोग के प्रशासनिक तंत्र और अन्य रसूखदार लाभार्थियों पर कार्रवाई की।
जीवन किशोर ध्रुव (जेके ध्रुव): सीजीपीएससी के तत्कालीन सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी।
आरती वासनिक: आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, जिनकी प्रश्नपत्रों को गोपनीय रूप से लीक कराने में केंद्रीय भूमिका पाई गई।
सुमित ध्रुव: तत्कालीन सचिव जेके ध्रुव के बेटे (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
निशा कोसले: पूर्व चेयरमैन के भाई की बहू (चयनित डिप्टी कलेक्टर)।
दीपा आडिल: चयनित जिला अधिकारी
भिलाई में एक और बड़ी रेड: भारतमाला प्रोजेक्ट भी निशाने पर
पीएससी घोटाले के समानांतर ही ईडी ने भिलाई के नेहरू नगर निवासी कारोबारी अनिल अग्रवाल के ठिकानों पर भी छापा मारा है। अनिल अग्रवाल का संबंध भारतमाला प्रोजेक्ट में हुई वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है। एक ही दिन में दो अलग-अलग बड़े मामलों में ईडी की इस चौतरफा कार्रवाई से पूरे प्रदेश के रसूखदारों, अफसरों और भूमाफियाओं में भारी दहशत का माहौल है।
