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*कुलपति को धमकी का आरोप, छात्र नेता पर केस*

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रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छात्रावास की जर्जर स्थिति को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने कृषि मौसम विज्ञान विभाग के पीएचडी छात्र सुजीत सुमेर और उसके सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।

आरोप है कि छात्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय परिसर में गैरकानूनी जमावड़ा किया, कुलपति कार्यालय के बाहर हंगामा किया, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, विश्वविद्यालय के अधिकारियों को धमकाया, कर्मचारियों के साथ अभद्रता की और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कुलपति और उनके परिवार की मानहानि करने वाली पोस्ट प्रसारित की।

कुलसचिव की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

एफआइआर के अनुसार विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. कपिल देव दीपक ने सात जुलाई को तेलीबांधा थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई। आवेदन में आरोप लगाया गया कि पीएचडी छात्र सुजीत सुमेर पिछले कुछ समय से विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति तथा अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगातार आक्रामक गतिविधियों में शामिल रहा है और उसका व्यवहार लगातार उग्र होता जा रहा है।

छात्रावास हादसे के बाद हुआ प्रदर्शन

शिकायत के अनुसार दो जुलाई 2026 की रात विश्वविद्यालय के शिवम छात्रावास में छज्जे का प्लास्टर गिरने की घटना हुई। आरोप है कि इस घटना को आधार बनाकर तीन जुलाई की दोपहर करीब एक से दो बजे के बीच सुजीत सुमेर ने एनएसयूआइ से जुड़े सात-आठ कार्यकर्ताओं एवं अन्य छात्रों को एकत्र कर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पहुंचकर प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर दबाव बनाने, प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने और भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। एफआइआर में इसे गैरकानूनी जमावड़ा और दंगा बताते हुए आपराधिक कृत्य माना गया है।

कुलपति सचिवालय के गेट में तोड़फोड़ का आरोप

एफआइआर में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान कुलपति सचिवालय के चैनल गेट को नुकसान पहुंचाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि यह शासकीय संपत्ति है और उसे जानबूझकर क्षति पहुंचाई गई। शिकायत में कहा गया है कि आरोपित ने अपने साथियों को उकसाया और उनके नेतृत्व में यह घटना हुई। विश्वविद्यालय ने इस नुकसान को लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाने का गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।

कुलपति को दी धमकी, अपमानजनक भाषा का आरोप

प्रदर्शन के दौरान कुलपति के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक और धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग किया गया। आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में अधिकारियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया जिससे कुलपति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और उनके मन में भय उत्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस तरह का व्यवहार शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करता है और लोकशांति भंग करने की स्थिति पैदा करता है।

इंटरनेट मीडिया पोस्ट भी जांच के दायरे में

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपित ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से कुलपति, उनके परिवार तथा विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के निजी कार्यक्रमों की तस्वीरें साझा कर उनके बारे में अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां पोस्ट कीं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन पोस्टों से अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। शिकायत के साथ फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशाट, संबंधित यूआरएल और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस अब साइबर एंगल से भी इनकी जांच करेगी।

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