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*आरोपी की मौत के बाद भ्रष्टाचार जांच पर नया नियम*

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रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ में अब सरकारी बाबू या अधिकारी के खिलाफ चल रही विभागीय जांच (DE) के दौरान अगर ‘राम-नाम सत्य’ हो गया, तो जांच की फाइलें भी हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े विभागीय जांच नियमों में यह रोचक संशोधन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव एसके सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर सभी विभागों, कलेक्टरों और संभागायुक्तों को नई व्यवस्था से अवगत करा दिया है।

अब तक विभागीय जांच की प्रक्रिया में कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी पत्राचार और कानूनी पेचीदगियां बनी रहती थीं, जिससे न केवल प्रशासनिक समय बर्बाद होता था बल्कि परिजनों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता था।

मृत व्यक्ति अपना बचाव नहीं कर सकता

सरकार के नए आदेश के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी पर गबन या वित्तीय अनियमितता का आरोप है और जांच लंबित है, तो उस कर्मचारी की मृत्यु होते ही विभागीय जांच स्वतः समाप्त मानी जाएगी। तर्क यह है कि मृत व्यक्ति अपना बचाव नहीं कर सकता, अतः जांच का कोई औचित्य शेष नहीं रहता।

वसूली पर नहीं मिलेगी छूट

हालांकि, यह राहत केवल जांच प्रक्रिया से मुक्ति तक सीमित है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित कर्मचारी के जीवित रहते ही विभाग ने दोष सिद्ध कर दिया था और उस पर शासकीय धन की वसूली या दंडादेश (Penalty) पारित कर दिया गया था, तो मौत के बाद भी यह वसूली नहीं रुकेगी। ऐसी स्थिति में, मृतक कर्मचारी के देय स्वत्वों (रिटायरमेंट बेनिफिट्स) से उस राशि की कटौती नियमानुसार की जाएगी।
प्रशासनिक कार्यों में आएगी एकरूपता

यह संशोधन 2011 और 2012 के पुराने आदेशों को रिप्लेस करेगा। शासन का मानना है कि इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता आएगी, बल्कि लंबी चलने वाली जटिल प्रक्रियाओं का भी समापन होगा। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो वर्षों तक लंबित जांच के कारण अपने स्वत्वों (Dues) के लिए भटकते रहते थे।

इन चार विभागों में ज्यादा शिकायतें

पंचायत एवं ग्रामीण विकास: निर्माण कार्यों और मनरेगा में वित्तीय अनियमितताओं के कारण सर्वाधिक जांचें लंबित।

लोक निर्माण विभाग (PWD): टेंडर प्रक्रिया और सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायतों की बहुलता।

राजस्व विभाग: भूमि रिकॉर्ड और नामांतरण में रिश्वतखोरी से जुड़े कई मामले।

स्वास्थ्य विभाग: उपकरणों की खरीद और नियुक्ति संबंधी घोटालों के प्रकरण सक्रिय हैं।

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