बिलासपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर पदोन्नति का कोटा 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किए जाने के निर्णय के खिलाफ दायर 39 जूनियर इंजीनियरों की याचिका को खारिज कर दिया है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति का अधिकार तो है, लेकिन उसे एक निश्चित प्रतिशत पर पदोन्नति का कोटा बनाए रखने का कानूनी या संवैधानिक अधिकार नहीं है।
पदोन्नति के अवसर कम होना अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पदोन्नति के अवसरों में कमी आना संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) या अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समता) का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ताओं में आशीष बंजारे, छगन लाल ठाकुर, मोनिका साय सहित अन्य 36 जूनियर इंजीनियर शामिल थे, जिन्होंने कोटा घटाए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला, नियोक्ता का अधिकार सर्वोपरि
मामले की सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि वर्ष 2018 में नियुक्ति के समय भी पदोन्नति का कोटा 40 प्रतिशत ही निर्धारित था। हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायदृष्टांतों और फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नियोक्ता (Employer) का अधिकार है कि वह अपने संस्थान में पदोन्नति के लिए क्या अवसर और शर्तें निर्धारित करता है। इन तर्कों के आधार पर अदालत ने याचिका को आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया।






