रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह को रायपुर केंद्रीय जेल शिफ्ट कर दिया गया है। प्रदेश में फांसी देने की व्यवस्था सिर्फ इसी जेल में है। हालांकि, तीनों को सुनाई गई सजा पर अमल आसान नहीं होगा।
क्योंकि प्रदेश में 12 साल में 6 लोगों को मृत्युदंड मिला पर उन पर अमल नहीं हो सका। वैसे इस मामले में भी पहले कई कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सबसे पहले सेशन कोर्ट के फैसले की हाईकोर्ट से पुष्टि जरूरी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील, समीक्षा और क्यूरेटिव याचिका के साथ दया याचिका के विकल्प भी उपलब्ध हैं। इन प्रक्रियाओं में चार साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
छत्तीसगढ़ में पिछले 12 साल के दौरान छह दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया, लेकिन किसी को फांसी नहीं दी गई। प्रदेश में आखिरी बार 1978 में बैजू उर्फ रामभरोसा को रायपुर केंद्रीय जेल में फांसी दी गई थी। इसके बाद से 48 साल में किसी भी दोषी को फांसी पर नहीं लटकाया गया है।
इससे पहले हत्या के एक मामले में सोनू सरदार को 2008 में मृत्युदंड सुनाया गया था। हालांकि, बाद में उसकी सजा आजीवन कारावास में बदल दी गई।
जेल अधिकारियों के मुताबिक, सेशन कोर्ट से मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले को अनिवार्य पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा जाता है। हाईकोर्ट सजा बरकरार रख सकता है, उसे कम कर सकता है या दोषसिद्धि रद्द कर सकता है। मृत्युदंड की पुष्टि होने पर दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है। इसके बाद भी न्यायिक और संवैधानिक विकल्प उपलब्ध रहते हैं।
इनका निपटारा होने और निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने के बाद ही फांसी का वारंट जारी किया जा सकता है।
2012 में एक को, 2018 में दो को फांसी की सजा
केस-1
हवलदार की पत्नी और बेटी की हत्या
दोषी: कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और फूल सिंह उर्फ टिंकू।
घटना: 13 अक्टूबर 2024 को हवलदार की पत्नी और बेटी की हत्या कर दी गई थी।
सजा: 8 अक्टूबर 2026 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों को मृत्युदंड सुनाया।
केस-2
5 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या
दोषी: राम सोना, दुर्ग।
घटना: 25 फरवरी 2015 को पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। शव नाले के पास फेंक दिया गया था।
सजा: 24 अगस्त 2018 को दुर्ग की विशेष पॉक्सो अदालत ने मृत्युदंड सुनाया।
केस-3
तंत्र-मंत्र के लिए 2 साल के बच्चे की बलि
दोषी: ईश्वरी लाल यादव और किरण यादव, दुर्ग।
घटना: 23 नवंबर 2010 को दो साल का बच्चा लापता हो गया था। तंत्र-साधना में सिद्धि पाने हत्या की गई थी।
सजा: 27 मार्च 2014 को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।






