रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा की कहानी दो सरकारों के फैसलों से होकर गुजरती है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्थापित हुई प्रतिमा को बदलने का फैसला भाजपा सरकार ने लिया। नई प्रतिमा तैयार हुई, ग्वालियर से छत्तीसगढ़ भी पह
इसी बीच पुरानी प्रतिमा के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। आखिर पुरानी प्रतिमा को बदलने की नौबत क्यों आई, नई प्रतिमा की स्थापना क्यों अटकी है और इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? चंदखुरी की राम प्रतिमा की पूरी कहानी।
2021 में स्थापित हुई थी 51 फीट ऊंची प्रतिमा
चंदखुरी को माता कौशल्या की नगरी और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। यहां स्थित माता कौशल्या मंदिर को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना के तहत काम कराया था।
मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के साथ भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई। अक्टूबर 2021 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ के पहले चरण के लोकार्पण समारोह के दौरान प्रतिमा का अनावरण किया था।
उस समय मंदिर परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण पर करीब 15 करोड़ 45 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई थी। ये राशि पूरे परिसर के विकास से जुड़ी थी, सिर्फ राम प्रतिमा की लागत नहीं थी।
उस समय प्रतिमा को राम के वनवासी स्वरूप में तैयार किया गया था। परियोजना का उद्देश्य भगवान श्रीराम के छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रसंगों को धार्मिक पर्यटन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना था। हालांकि, प्रतिमा स्थापित होने के बाद उसके स्वरूप को लेकर विवाद शुरू हो गया।
मूर्ति के स्वरूप पर भाजपा ने उठाए थे सवाल
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्थापित प्रतिमा को लेकर उस समय विपक्ष में रही भाजपा ने सवाल उठाए थे। भाजपा नेताओं की आपत्ति थी कि प्रतिमा में भगवान श्रीराम का चेहरा और शारीरिक बनावट उनके धार्मिक स्वरूप और जनमानस में स्थापित छवि के अनुरूप नहीं है। प्रतिमा की नाक, हाथ और पैरों की बनावट को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं।
इस तरह, प्रतिमा स्थापित होने के कुछ समय बाद ही उसका स्वरूप राजनीतिक बहस का विषय बन गया। भाजपा नेताओं ने नई प्रतिमा लगाने की मांग की थी। हालांकि, किसी प्रतिमा के कलात्मक स्वरूप को लेकर राजनीतिक या धार्मिक आपत्ति होना और उसका तकनीकी रूप से असुरक्षित या दोषपूर्ण होना अलग-अलग बातें हैं। इन दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
भाजपा सरकार आई तो नई प्रतिमा बनाने का फैसला
दिसंबर 2023 में राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद चंदखुरी की प्रतिमा बदलने का मुद्दा फिर सामने आया। तत्कालीन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने नई प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद वर्तमान प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा तैयार कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पुरानी प्रतिमा को लेकर केवल स्वरूप संबंधी आपत्ति ही नहीं थी, बल्कि तैयार कराई गई एक दूसरी प्रतिमा के अनुपात को लेकर भी असहमति थी। विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड यानी टीसीआईएल के माध्यम से कराए गए काम में तैयार प्रतिमा का अनुपात स्वीकार्य नहीं पाया गया और उसे बदलने के लिए कहा गया।
इसके बाद ग्वालियर के मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा को नई प्रतिमा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। वे राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित मूर्तिकार हैं। नई प्रतिमा का स्वरूप भी वनवासी भगवान श्रीराम का रखा गया, ताकि वह राम वन गमन पर्यटन परिपथ की अवधारणा से जुड़ी रहे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मुताबिक, नई प्रतिमा की स्थापना की तारीख मंदिर समिति को तय करनी है। उन्होंने समिति से जल्द तारीख निर्धारित करने का आग्रह किया है। मंत्री ने कहा कि नई प्रतिमा को स्थापित करने की तैयारी की जा रही है और तारीख तय होते ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नई प्रतिमा पर करीब ₹1 करोड़ का खर्च
नई प्रतिमा मध्य प्रदेश के ग्वालियर में तैयार की गई। इसके निर्माण में ग्वालियर के सैंडस्टोन यानी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रतिमा के निर्माण पर करीब 72 लाख रुपये खर्च हुए।
इसे छत्तीसगढ़ लाने और स्थापित करने में करीब 22 से 25 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च का अनुमान बताया गया था। इस हिसाब से निर्माण, परिवहन और स्थापना का कुल अनुमानित खर्च करीब एक करोड़ रुपये बैठता है।
नई प्रतिमा की एक खासियत इसमें 108 रुद्राक्ष मनकों का शिल्पांकन बताया गया है। इसे तैयार करने में करीब 22 से 25 कारीगरों की टीम के काम करने की जानकारी भी रिपोर्टों में आई थी।
नई प्रतिमा जनवरी 2026 में तैयार होने के बाद उसे छत्तीसगढ़ लाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। फरवरी 2026 में इसे छत्तीसगढ़ लाया गया लेकिन प्रतिमा अब भी गोढ़ी गांव में रखी हुई है।
नई प्रतिमा भी एक ही पत्थर की नहीं है
चंदखुरी की नई प्रतिमा को लेकर एक अहम तकनीकी पहलू यह है कि इसे एक ही विशाल पत्थर से तैयार करके सीधे खड़ा नहीं किया जाना है। जानकारी के मुताबिक 51 फीट ऊंची नई प्रतिमा को 14 बड़े हिस्सों में तैयार किया गया है। इन हिस्सों को ट्रेलर से चंदखुरी लाकर मौके पर जोड़ा जाना है।
इसका मतलब यह नहीं है कि प्रतिमा खंडित है। विशाल प्रतिमाओं के मामले में पत्थर की उपलब्धता, परिवहन की सीमाएं, वजन, सड़क मार्ग, क्रेन की क्षमता और स्थापना की तकनीकी जरूरतों के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में निर्माण किया जा सकता है। इसके बाद निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार हिस्सों को जोड़ा और आधार से सुरक्षित रूप से जोड़ा जाता है।
इसलिए प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों में तैयार होने और मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने के बीच अंतर समझना जरूरी है। असली सवाल ये है कि जोड़ कितने मजबूत हैं, पत्थर की गुणवत्ता कैसी है, स्थापना का आधार कितना सुरक्षित है और प्रतिमा पर मौसम तथा दूसरे बाहरी प्रभावों का क्या असर पड़ता है।
पुरानी प्रतिमा कैसे क्षतिग्रस्त हुई?
पिछले दिनों चंदखुरी में वर्तमान में स्थापित प्रतिमा का पिछला हिस्सा क्रैक होकर गिर गया। इस मामले में गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष आचार्य राजीव लोचन महाराज ने दावा किया कि पुरानी प्रतिमा निर्माण के समय ही खंडित हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे स्थापित कर दिया गया।
कौशल्या मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा ने बताया कि पिछली सरकार के समय जब भगवान राम की प्रतिमा लगाई गई तब ना मंदिर समिति वालों को इसकी जानकारी थी और ना ही गांव वालों को। उस समय जल्दबाजी में ये प्रतिमा लगाई गई और यही वजह है कि अब इसके अलग-अलग हिस्से खंडित होकर गिर रहे हैं।
जबकि मंदिर के पुजारी रमेश शर्मा का कहना है कि बाहर लगी प्रतिमा केवल शो पीस जैसी ही है। क्योंकि उसे अलग-अलग पत्थरों से जोड़कर बनाया गया है। शर्मा का कहना है कि वे परिसर में स्थापित इस प्रतिमा को पूजनीय विग्रह के रूप में स्वीकार नहीं करते। उनके मुताबिक, प्रतिमा के निर्माण और स्वरूप को लेकर उनकी आपत्ति है।
विशाल प्रतिमा लगाने के नियम क्या कहते हैं?
देश में बड़ी सार्वजनिक प्रतिमाओं की स्थापना के लिए केवल मूर्तिकार का चयन और पत्थर की गुणवत्ता ही पर्याप्त नहीं होती। प्रतिमा की ऊंचाई, वजन, आधार, जमीन की क्षमता, हवा का दबाव, भूकंपीय जोखिम, जोड़, परिवहन और स्थापना की सुरक्षा का भी आकलन जरूरी होता है।
भारतीय मानक ब्यूरो का नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया-2016 भवनों और संबंधित संरचनाओं की सुरक्षा, भार, हवा के दबाव, भूकंप के प्रभाव, नींव और निर्माण संबंधी कई मानक निर्धारित करता है।
यह एक मॉडल कोड है, जिसका इस्तेमाल संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों द्वारा लागू नियमों के साथ किया जाता है। विशाल प्रतिमाओं के मामले में संबंधित संरचनात्मक डिजाइन मानकों और परियोजना की तकनीकी शर्तों के अनुरूप इंजीनियरिंग जांच जरूरी होती है।
राम वन गमन पथ पर और कितनी प्रतिमाएं लगेंगी?
राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़े अलग-अलग स्थलों को विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के अंतर्गत सात स्थानों पर भगवान श्रीराम की प्रतिमाएं लगाने का प्रस्ताव सामने आया था। इनमें से 6 प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी थीं। चंदखुरी की प्रतिमा इस परियोजना की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जबकि बाकी प्रतिमाओं की ऊंचाई लगभग 25 फीट थी।






