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*रायपुर की फॉरेंसिक लैब हाईटेक, अमेरिका तक मान्य रिपोर्ट*

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सेंट्रल इंडिया की पहली सिंथेटिक मीडिया डिटेक्शन सुविधा
1200 से ज्यादा फोन-लैपटॉप की जांच, केंद्र से मिलेंगे ‌80 करोड़

रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) राजधानी की राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) अब डिजिटल सबूतों की हाईटेक जांच का सेंटर बन गई है। सेंट्रल इंडिया की पहली सिंथेटिक मीडिया डिटेक्शन सुविधा में धुंधले सीसीटीवी फुटेज से लेकर लॉक आईफोन-टैब की कोडिंग और डीपफेक फोटो-वीडियो की जांच हो रही है। अब तक 1200 से ज्यादा फोन और लैपटॉप की जांच की जा चुकी है। 130 से ज्यादा डिवाइस की जांच कर रिपोर्ट दी गई है। एक्सपर्ट मल्टीमीडिया फोरेंसिक के जरिए पिक्सल, रोशनी-परछाई, लिप-सिंक, ऑडियो स्पेक्ट्रोग्राम और मेटाडेटा की जांच कर रहे हैं।

आईटी, सीबीआई, ईडी, एनआईए, डीआरआई और एनसीबी जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच के लिए राज्य फोरेंसिक लैब की मदद ले रही हैं। अब इन डिवाइस को जांच के लिए बाहर नहीं भेजना पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक फोरेंसिक लैब के लिए नए सॉफ्टवेयर खरीदने की तैयारी है। केंद्र सरकार इसकी क्षमता और सुविधाएं बढ़ाने के लिए 80 करोड़ रुपए देने वाली है। डीपफेक की जांच के लिए महंगे सॉफ्टवेयर खरीदे जाएंगे। एआई आधारित डिटेक्शन टूल से भी कंटेंट की जांच की जाएगी।

टूटे फोन से लेकर महंगे आईफोन तक जांच

किसी भी मामले में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का डेटा सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। इनमें फोन, टैब, लैपटॉप, पेनड्राइव समेत अन्य डिवाइस शामिल हैं। करीब 90 फीसदी मामलों में पुलिस के पास पासवर्ड या पैटर्न लॉक नहीं होता। खासतौर पर आईफोन को खोलने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। इसके बावजूद टूटे हुए, पानी में डूबे फोन से लेकर हर तरह के डिवाइस की जांच यहां की जा रही है। वाट्सएप, टेलीग्राम का चैट, फेसबुक-इंस्टाग्राम का डेटा रिकवर किया जा रहा है।

डीपफेक पकड़ने हाईटेक जांच डीपफेक की पहचान के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट वीडियो और फोटो की कई स्तरों पर जांच करते हैं। पिक्सल टेस्ट में चेहरे के किनारों पर धुंधलापन और एडिटिंग के निशान तलाशे जाते हैं। लाइट-शैडो टेस्ट में चेहरे पर पड़ रही रोशनी और परछाई का आसपास के दृश्य से मिलान किया जाता है। लिप-सिंक टेस्ट में आवाज और होंठों की हरकत को फ्रेम-दर-फ्रेम जांचते हैं। ऑडियो टेस्ट में स्पेक्ट्रोग्राम के जरिए सांस, ठहराव और बैकग्राउंड नॉइस का विश्लेषण होता है। मेटाडेटा से फाइल की तारीख, डिवाइस और एडिटिंग सॉफ्टवेयर की जानकारी निकालकर स्रोत और छेड़छाड़ की पुष्टि की जाती है।

यूपी, बिहार, महाराष्ट्र से ज्यादा हाईटेक: राज्य फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट को 18 देशों में दोबारा जांच के लिए भेजा गया। सभी जगह की रिपोर्ट रायपुर की लैब की रिपोर्ट की तरह रही। इसलिए विदेशों में भी यहां की लैब की रिपोर्ट मान्य है। उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों में इस तरह की जांच की सुविधा नहीं है। रायपुर की लैब में यह जांच चल रही है। केंद्रीय फोरेंसिक लैब से भी जांच के लिए यहां सैंपल भेजे जा रहे हैं।

हर तरह की डिजिटल जांच: राज्य फोरेंसिक लैब में हर तरह की डिजिटल जांच की जा रही है। टूटे फोन से लेकर धुंधले फुटेज की जांच हो रही है। डीफेक की जांच भी की जा रही है।
-टीएल चंद्रा, संयुक्त संचालक एफएसएल

 

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