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*भोजली महोत्सव परम्परागत व बड़े धूम धाम से मनाया गया*

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सियासत दर्पण न्यूज़ से दुख हरण सिंह ठाकुर 

कवर्धा ।(सियासत दर्पण न्यूज़)  हर वर्ष की भाती इस साल भी कवर्धा राजमहल में भोजली महोत्सव परम्परागत व बड़े धूम धाम से मनाया गया जिले भर तथा आस पास के ग्रामों से आए महिलाओं तथा स्थानीय महिला मानस मंडली के महिलाओं के बीच कवर्धा रियासत के महारानी व त्रिपुरा के सांसद रानी कृतिदेवी सिंह ने सोलहवीं सिंगार कर विराजमान थी जहां स्थानीय कलाकारों के द्वारा सुमधुर भजनों का कार्यक्रम के बीच भोजली महोत्सव मनाया गया सभा को संबोधन के बाद शहर के घरों से व राजमहल में बोए गए भोजली का महारानी कृतिदेवी ने विधि विधान से पूजा अचना कर अच्छी बारिश व प्रदेश की खुशहाली की कामना करते हुए आरती उतारी ,इसी बीच स्थानीय पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए शंकानंद किया गया पश्चात जुलूस के साथ  भोजली को विसर्जित करने ले जाया गया। रक्षाबंधन के दूसरे दिन भाद्र कृष्ण पक्ष की पहली तिथि को आयोजित होने वाले इस पर्व को लेकर इस बार उत्साह रहा। महिलाएं और बच्चे अपने सिर पर भोजली की टोकरी लेकर विसर्जन के लिए भोजली तालाब पर पहुंची। नागपंचमी के दिन चुरकी, टुकनी में मिट्टी लाकर उसमें गेहूं को भिगाकर भोजली बोने के बाद दस दिनों तक ग्राम देवता की आराधना के साथ पानी सींचते हुए अपनी भोजली का खूब जतन किया गया। फिर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भोजली का विसर्जन किया गया।
सेल्फी का रहा जुनून
भोजली तालाब में भोजली विसर्जन के दौरान अधिकांश युवतियां, महिलाएं व बच्चे हाथ पर मोबाइल पर सेल्फी लेते रहे। भोजली विसर्जन की तस्वीरों के साथ अपने सखी-सहेलियों और परिवार के सदस्यों के साथ मोबाइल पर सेल्फी का जुनून दिखा।
भोजली खोंसकर बनते है मित्र
भोजली विसर्जन के बाद बालियां लेकर घरों में एक दूसरे के कान में भोजली खोंसकर मितान या गियां बदने की परंपरा है। इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का फ्रेंडशिप डे भी कहा जाता है। वनांचल में भी एक दूसरे के कान में भोजली खोंसकर मित्र बनते देखा गया। वहीं बड़ों के हाथों में भोजली देकर आशीर्वाद लेने की परंपरा का निर्वहन किया गया।
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