रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ के 21 विधायकों पर विभिन्न अदालतों में मुकदमे लंबित हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में चार विधायकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई है। ताजा मामला जांजगीर-चांपा के जैजैपुर से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू का है, जिन्हें किसान से 42.78 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
वहीं, पूर्व मंत्री व कोंटा विधायक कवासी लखमा भ्रष्टाचार के मामले में घिरे हैं और वर्तमान में जेल में हैं। सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े पर भड़काऊ भाषण और जशपुर की भाजपा विधायक रायमुनी भगत पर धार्मिक टिप्पणी के जरिए भावनाएं आहत करने का आरोप है। दागी जनप्रतिनिधियों की यह बढ़ती सूची सूबे की सियासत में चर्चा का विषय बनी हुई है।
विधानसभा चुनाव के दौरान जीते थे इतने दागी
विधानसभा चुनाव 2023 में जीत हासिल करने वाले 90 विधायकों में से 17 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और छत्तीसगढ़ इलेक्शन वॉच ने सभी विजेता उम्मीदवारों के स्व-शपथ पत्रों के विश्लेषण में यह तथ्य पेश किया था।
क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 90 विजेता उम्मीदवारों में से 17 यानी लगभग 19 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इनमें से केवल छह विजेता उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है।
तुलना करें तो वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में 24 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे, जिनमें से 13 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
क्या कहते हैं पार्टीवार आंकड़े
पार्टीवार आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भाजपा के 54 विजेता उम्मीदवारों में से 12 और कांग्रेस के 35 विजेता उम्मीदवारों में से पांच ने अपने हलफनामों में स्वयं के खिलाफ आपराधिक मामलों को घोषित किया है।
वहीं, गंभीर आपराधिक मामलों के मामले में भाजपा के चार और कांग्रेस के दो विजेता विधायकों ने ऐसी जानकारी अपने शपथपत्रों में दी है।
इनके खिलाफ केस
2023 के विधानसभा चुनाव के समय की स्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (पाटन), देवेंद्र यादव (भिलाई नगर) और अटल श्रीवास्तव (कोटा) कांग्रेस के उन विजेताओं में शामिल हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज थे।
इसी तरह पूर्व मंत्री राजेश मूणत (रायपुर शहर पश्चिम) और दयालदास बघेल (नवागढ़), शकुंतला सिंह पोर्ते (प्रतापपुर), उधेश्वरी पैकरा (सामरी), ओपी चौधरी (रायगढ़) विजय शर्मा (कवर्धा सीट), विनायक गोयल (चित्रकोट-एसटी) और आशाराम नेताम (कांकेर-एसटी) भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों में से हैं, जिन पर रिपोर्ट के अनुसार आपराधिक मामले दर्ज थे।
2018 के चुनाव में ऐसे विधायकों की संख्या 24 थी और 2013 के विधानसभा चुनाव में जीते 14 विधायकों पर आपराधिक केस दर्ज थे।
देश के 45 प्रतिशत विधायकों पर मामले
चुनाव सुधार के क्षेत्र में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट 2025 में राजफाश हुआ है कि देश के 45 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
एडीआर ने 28 राज्यों और विधानसभा वाले तीन केंद्रशासित प्रदेशों के कुल 4,123 विधायकों में से 4,092 विधायकों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण किया है।
आंध्र प्रदेश में विधायकों का प्रतिशत सबसे अधिक
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में आपराधिक मामलों वाले विधायकों का प्रतिशत सबसे अधिक है, जहां 174 में से 138 विधायकों (79 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।
वहीं, सिक्किम में यह आंकड़ा सबसे कम है, जहां 32 विधायकों में से केवल एक विधायक (3 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की जानकारी दी है।







