रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) राजधानी रायपुर में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन में तीन अवैध कॉल सेंटरों पर एक साथ दबिश देकर 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एंड साइबर) स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त (मध्य जोन) उमेश प्रसाद गुप्ता और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम जोन) संदीप पटेल के निर्देशन में की गई।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 67 मोबाइल, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर और 3 वाईफाई राउटर जब्त किए हैं। गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट कर लोन और सिबिल स्कोर सुधार के नाम पर ठगी करता था
पहला चरण: डेटा कलेक्शन और टारगेट
व्हाट्सएप, टेलीग्राम और मेल ग्रुप्स के जरिए अमेरिका के लोन आवेदकों का डेटा जुटाया जाता था। इंटरनेट कॉलिंग ऐप के माध्यम से कॉल कर स्क्रिप्ट के आधार पर बातचीत की जाती थी।
दूसरा चरण: सिबिल स्कोर के नाम पर भरोसा
पीड़ित से बैंकिंग जानकारी लेकर उसे सिबिल स्कोर खराब बताया जाता था और सुधार का झांसा दिया जाता था।
तीसरा चरण: फर्जी चेक से रकम दिखाना
“क्लोन चेक” के जरिए पीड़ित के खाते में छोटी रकम जमा दिखाकर सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाया जाता था।
चौथा चरण: रकम वापस मांगना
भरोसा बनने के बाद पीड़ित से “गिफ्ट कार्ड” के जरिए रकम वापस मांगी जाती थी।
पांचवां चरण: गिफ्ट कार्ड से हवाला ट्रांसफर
गिफ्ट कार्ड को कैश में बदलकर रकम हवाला के जरिए भारत भेजी जाती थी, जो अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी।
डिजिटल अरेस्ट से डराकर वसूली
गिरोह पीड़ितों को डराने के लिए फर्जी अरेस्ट वारंट भेजता था और तुरंत भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी देता था, जिससे लोग मानसिक दबाव में पैसे दे देते थे।
रायपुर से संचालित हो रहा था नेटवर्क
थाना गंज के पिथालिया कॉम्प्लेक्स में दो कॉल सेंटर और न्यू राजेंद्र नगर के अंजनी टॉवर में एक कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। गुजरात से मास्टरमाइंड और चीन से तकनीकी सपोर्ट मिल रहा था।
देश के सात राज्यों गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मेघालय, हरियाणा और पंजाब के युवक इस नेटवर्क में शामिल थे।
इंटेलिजेंस इनपुट से टूटा नेटवर्क
25 मार्च को पुलिस को गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद कार्रवाई कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया।






