रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ में ओबीसी समाज ने जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर अपनी मांग तेज कर दी है। पदाधिकारियों ने साफ किया है कि, यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। 21 अप्रैल को प्रदर्शन की तैयारी भी की जा रही है।

समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कई अहम मुद्दों को उठाया है। इसमें जातिवार जनगणना कराने, 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने, यूजीसी में सह-आरक्षण, मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने, न्यायपालिका में ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने और क्रीमी लेयर और NFS व्यवस्था की समीक्षा जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल हैं।
प्रदेश में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर और परिवार की बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी।
इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। 16 से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है, जिसमें यूनिक आईडी जनरेट होगी।
घर-घर जाकर जुटेगी 33 तरह की जानकारी
इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या और पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट जैसी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। साथ ही परिवार के सदस्यों और वाहनों की जानकारी भी दर्ज होगी।
हर घर होगा डिजिटल मैप पर दर्ज
इस बार हर मकान की जियो-टैगिंग कर उसे डिजिटल मैप से जोड़ा जाएगा। इससे आपदा प्रबंधन, शहरी प्लानिंग, परिसीमन और मतदाता सूची सुधार जैसे कार्यों में मदद मिलेगी।
जानकारी रहेगी पूरी तरह गोपनीय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल नीतिगत फैसलों के लिए किया जाएगा।
निगरानी के लिए कंट्रोल रूम
जनगणना की मॉनिटरिंग के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अधिकृत कर्मचारियों को ही सही जानकारी दें।






