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*अधिकारी के तोते को पेड़ से उतारने में फायर ब्रिगेड ने बहाए हजारों लीटर पानी*

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नारायणपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) नारायणपुर जिले से एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने के बजाय एक तोते को पकड़ने के प्रयास में लगी नजर आ रही है। यह घटना जिला मुख्यालय स्थित ओबीसी बॉयज हॉस्टल के पास का बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फायर ब्रिगेड से जुड़े एक अधिकारी का पालतू तोता पिंजरे से निकलकर पास के एक ऊंचे साल के पेड़ पर जा बैठा। इसके बाद उसे नीचे उतारने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी को मौके पर बुलाया गया।

वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि पेड़ पर बैठे तोते को नीचे लाने के लिए फायर ब्रिगेड द्वारा तेज पानी की बौछार की जा रही है। काफी देर तक पानी डालने के बाद तोता भीगकर नीचे गिर जाता है, जिसके बाद उसे पकड़ लिया जाता है।
फायर वाहन का “प्रेशर चेक” किया जा रहा था

घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद जिला सेनानी मनोहर लाल चौहान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि फायर वाहन का “प्रेशर चेक” किया जा रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तोता किसका था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

इस घटना के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या एक तोते को पकड़ने के लिए फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन संसाधनों का उपयोग उचित है? फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर इंटरनेट मीडिया पर बहस जारी है। कुछ लोग इसे हल्के-फुल्के अंदाज में देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे संसाधनों के दुरुपयोग के रूप में गंभीरता से ले रहे हैं।
एक लाख का मोबाइल निकालने बहाया था 21 लाख लीटर पानी

तोते को पेड़ से उतारने के लिए फायर ब्रिगेड द्वारा हजारों लीटर पानी बहाने की घटना के बीच कांकेर जिले का एक पुराना मामला भी फिर सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2023 में यहां एक फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास पर डैम का भारी मात्रा में पानी बर्बाद करने का आरोप लगा था।

जानकारी के अनुसार, पखांजूर क्षेत्र में सेल्फी लेते समय उनका मोबाइल फोन जलाशय में गिर गया था। उसे निकालने के लिए चार दिनों तक डैम से पानी निकाला गया, जिससे अनुमानित 21 से 41 लाख लीटर तक पानी बहने की बात सामने आई थी।

इस घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित किया था और जांच भी शुरू की गई थी। इस मामले में जल संसाधन विभाग ने जुर्माना भी लगाया था और इसे गंभीर लापरवाही माना गया था।

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