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*छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों पर यू-टर्न*

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रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय सेवकों के लिए आचरण नियमों को लेकर पहले सख्त निर्देश जारी किए, लेकिन अब इन पर फिलहाल रोक लगा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए थे।

जिसमें कहा था कि, पूर्व आदेश को स्थगित किया गया गया है। पूर्व आदेश में सरकारी कर्मचारी को किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि, संगठन या अन्य पदों पर सक्रिय रहने पर रोक लगाई गई थी।

21 अप्रैल को जारी निर्देशों में साफ कहा गया था कि, कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बनेगा और न ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा ले सकेगा। साथ ही अधिकारी के बिना अनुमति के किसी भी संस्था, समिति या संगठन में पद धारण करने पर भी रोक लगाई गई थी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि, शासकीय सेवक किसी ऐसे पद या जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे उनके कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो। नियमों का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि, 22 अप्रैल 2026 को जारी नए आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग ने इन सभी निर्देशों को आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है। उप सचिव अंशिका पांडेय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि 21 अप्रैल के आदेश के निर्देश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेंगे, जिससे अब इन नियमों पर कार्रवाई पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

इस आदेश के स्थगित होने पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि, कर्मचारी संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगे सरकार के समक्ष रखता है, इस तरह का आदेश इस व्यवस्था के विपरीत था। इसे लेकर हमने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और उपसचिव के समक्ष कड़ा विरोध किया था जिसके बाद फैसले पर रोक लगाया गया है।

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