रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा घोटाले में गुरुवार को ईडी की टीम ने रायपुर, भिलाई, कोरबा, अंबिकापुर और बिलासपुर में दबिश दी है। ईडी अब इस मामले में बड़े नेताओं और आईएएस अधिकारियों के कथित मनी ट्रेल को खंगाल रही है।
भाजपा नेता और दुर्ग विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले अमर इंफ्रा के संचालक चतुर्भुज राठी के भिलाई की महेश कॉलोनी में स्थित घर पर ईडी की टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है।
नेताओं ने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी और मुआवजा लिया
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जिन क्षेत्रों से भारतमाला प्रोजेक्ट गुजर रहा था, वहां प्रभावशाली नेताओं ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी और बाद में उसी जमीन का भारी मुआवजा हासिल किया। पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों ने मुआवजे के प्रकरण तैयार कर कलेक्टरों को भेजे थे, जिन पर हस्ताक्षर के बाद भुगतान जारी किया गया।
भाजपा नेता से जुड़े दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं
27 अप्रैल को ईडी ने धमतरी के कुरुद में पूर्व मंत्री के भाई और रिश्तेदारों के अलावा अभनपुर में गोपाल गांधी के ठिकाने पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज बरामद किए थे, जिनसे राजनीतिक कड़ियों के जुड़ने के संकेत मिले हैं।इनमें एक बड़े भाजपा नेता से जुड़े दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इधर बिलासपुर में ईडी की टीम ने गुरूवार सुबह जाने-माने सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई से शहर के व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
दस्तावेजों और लेन-देन की जांच
मिली जानकारी के अनुसार, ईडी के 10 से ज्यादा अधिकारियों की टीम ने तड़के ही कारोबारी विवेक अग्रवाल के निवास पर दबिश दी। इसके साथ ही टीम शहर के मध्यनगरी चौक स्थित उनकी ज्वेलरी दुकान श्रीराम ज्वेलर्स भी पहुंची, जहां दस्तावेजों और लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।
विकास अग्रवाल हुआ फरार
विवेक अग्रवाल बिलासपुर के बड़े सर्राफा कारोबारियों में गिने जाते है। बताया जा रहा है कि, यह कार्रवाई उनके भाई विकास अग्रवाल से जुड़े शराब घोटाले के तार सामने आने के बाद की गई है। विकास अग्रवाल फिलहाल इस मामले में फरार बताया जा रहा है।
शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप
विकास अग्रवाल पर करीब 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप है। उसे इस घोटाले के सिंडिकेट का अहम सदस्य माना जा रहा है। साथ ही, उसका नाम कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपित अनवर ढेबर के करीबी सहयोगियों में भी सामने आया है। फिलहाल ईडी की टीम दोनों ठिकानों पर दस्तावेज खंगाल रही है और आगे की जांच जारी है।






