*”रिजल्ट से पहले ठगी का नया खेल: पास कराने के लिए मांग रहे लाखों”*

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रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा बुधवार को जारी 10वीं-12वीं के नतीजों में ठग भी सक्रिय रहे। नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया है कि रिजल्ट घोषित होने के 24 घंटे पहले ही साइबर ठगों के पास छात्रों का पूरा कच्चा चिट्ठा मौजूद था।

ठगों ने फेल होने का डर दिखाकर न केवल अभिभावकों को मानसिक तनाव दिया, बल्कि पास कराने के नाम पर रुपये ऐंठ लिए।

खुद को शिक्षा विभाग का अधिकारी बताया

पड़ताल में सामने आया कि भिलाई सेक्टर-छह में रहने वाले अभिभावक के पास मंगलवार दोपहर डेढ़ बजे (रिजल्ट से एक दिन पहले) मोबाइल पर 8521883569 से कॉल आया। फोन करने वाले ने सीधे छात्रा का नाम लिया और खुद को शिक्षा विभाग का अधिकारी बताया।

5000 रुपये दो तो हम पास कर देंगे

ठग ने कहा- आपकी बेटी की गणित में सप्लीमेंट्री आ गई है। 5000 रुपये दो तो हम पास कर देंगे। ठग ने यहां तक कहा कि अगर नंबर बढ़वाना भी होगा, तो भी हो जाएगा। बस चार्ज बढ़ जाएगा। 80% से ज्यादा अंक चाहिए तो 20 हजार रुपये लगेंगे।

अंत में सप्लीमेंट्री से पास कराने का सौदा 3,000 रुपये में तय हुआ। ठग ने करन कुमार के नाम से एक नंबर दिया और उसमें ऑनलाइन रुपये डालने के लिए कहा।

ठग ने 127 विद्यार्थियों की बताई वेटिंग

ठग ने सौदे के दौरान कहा कि जल्दी पैसे डाल दो, 127 लोग पहले से वेटिंग पर हैं। सप्लीमेंट्री से पास कराने वालों में 128वां उनकी बेटी का नंबर होगा। ठग के झांसे में आकर अभिभावक ने उसके बताए नंबर पर 2,000 रुपये डाल दिए, बाकी काम होने के बाद देने की बात हुई।

परिणाम जारी होने के आधे घंटे के बाद से नंबर बंद

अभिभावक ने डर में आकर 7645824959 (करन कुमार) नंबर पर पैसे भेज दिए। बुधवार को जब असली रिजल्ट आया तो छात्रा चार विषयों में फेल थी। बावजूद इसके ठग ने यह कहकर और पैसे ऐंठ लिए कि बाकी पैसे डालो, आधे घंटे में पोर्टल अपडेट कर पास वाला रिजल्ट चढ़ा दूंगा। आधे घंटे बाद कॉल करने पर नंबर बंद आया। इसके बाद अभिभावक को ठगी का अहसास हुआ।

बड़ा सवाल: ठगों के पास कहां से आया विद्यार्थी का डेटा?

यह घटना केवल ठगी तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिजल्ट आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही ठगों को यह कैसे पता चला कि किस छात्र का नाम क्या है? उसके अभिभावक का नंबर क्या है और वह किन विषयों में कमजोर है? यह विभाग के भीतर या डेटा हैंडलिंग प्रक्रिया में किसी बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

बोर्ड का परिणाम पूरी तरह सुरक्षित है और वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद इसमें किसी भी तरह की छेड़खानी संभव नहीं है। यदि कोई अभिभावक लिखित शिकायत करता है तो हम साइबर पुलिस की मदद से इन नंबरों की जांच कराएंगे और सख्त कार्रवाई करेंगे।

– पुष्पा साहू, सचिव, माशिमं, छत्तीसगढ़ शासन

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