*अवैध निर्माण रोकने के लिए नई कार्रवाई, अव्यवस्थित बसाहटों पर लगेगा शिकंजा*

रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़)  राजधानी रायपुर, नवा रायपुर, दुर्ग-भिलाई और आसपास के तेजी से फैलते इलाकों में अब जमीन विकास पुराने तरीके से नहीं हो सकेगा। सरकार ‘स्टेट कैपिटल रीजन’ (एससीआर) का प्रारूप तैयार कर रही है।

इसके लागू होने के बाद बिना तय मानकों के कॉलोनी बसाना, बाजार विकसित करना या अव्यवस्थित निर्माण करना मुश्किल हो जाएगा। नए सिस्टम में यह पहले से तय होगा कि किस इलाके में आवासीय कॉलोनी बनेगी, कहाँ उद्योग लगेंगे और कौन-सी जमीन कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित रहेगी।

सरकार की तैयारी पूरे क्षेत्र को एक मास्टर प्लान के तहत विकसित करने की है। इसके लिए किसी भी इलाके में कॉलोनी या बाजार विकसित करने से पहले विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में सड़क, ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी और मौजूदा आधारभूत सुविधाओं को आधार बनाया जाएगा। रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि कौन-सी जमीन किस उपयोग के लिए उपयुक्त है। प्रशासन की अनुमति के बिना विकास कार्य संभव नहीं होगा।

अभी बिना सुविधाओं की है बसाहट
फिलहाल आउटर इलाकों में खेतों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। कई जगह बिना सड़क, नाली और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के ही कॉलोनियां बस रही हैं। सस्ते प्लॉट के कारण लोग जमीन तो खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में बिजली, पानी, सड़क और वैध दस्तावेजों के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
एससीआर लागू होने के बाद बिना डायवर्सन और बिना स्वीकृत लेआउट के कॉलोनी विकसित करना लगभग असंभव हो जाएगा। नई व्यवस्था में डेवलपर्स को सड़क, ड्रेनेज, पार्किंग, पानी और सार्वजनिक सुविधाओं के मानक पहले पूरे करने होंगे।

डिजिटल निगरानी से शुरुआती स्तर पर पकड़ेंगे गड़बड़ी
अवैध निर्माण और प्लाटिंग रोकने के लिए डिजिटल मैपिंग और ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर नियम विरुद्ध हो रहे विकास कार्यों को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ने की योजना है। सरकार रजिस्ट्री प्रक्रिया को भी ‘विकास अनुमति’ से जोड़ने की तैयारी में है, ताकि अवैध प्लॉट की बिक्री रोकी जा सके। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी रहेगा। सरकार का फोकस लोगों को वैध और योजनाबद्ध कॉलोनियों की ओर लाने पर है।

उद्योग और निवेश के लिए भी बनेगा नया ढांचा
एससीआर का असर केवल आवासीय विकास तक सीमित नहीं रहेगा। उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और आईटी पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भी अलग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। अभी निवेशकों को अलग-अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे परियोजनाओं में देरी होती है। नए ढांचे में निवेश क्षेत्र पहले से चिन्हित किए जाएंगे, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे रियल एस्टेट और कॉमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बाहरी निवेश भी आकर्षित होगा।

ट्रैफिक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी फोकस
रायपुर-नवा रायपुर-दुर्ग बेल्ट में तेजी से शहरी विस्तार हुआ है, लेकिन भविष्य की आबादी के हिसाब से सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक नेटवर्क की तैयारी कमजोर मानी जा रही है। एससीआर के तहत रीजनल मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और संभावित मेट्रो या मास ट्रांजिट जैसी योजनाओं पर भी काम किया जाएगा। सरकार की कोशिश राजधानी क्षेत्र को सिर्फ फैलाने की नहीं, बल्कि तय मास्टर प्लान के तहत विकसित करने की है, ताकि आने वाले वर्षों में अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या कम हो सके।

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