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*‘बड़ी मां’ समेत 5 दोषियों की उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील ठुकराई*

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बिलासपुरः (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शहर के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले मासूम विराट सराफ अपहरण कांड के आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने निचली अदालत (सत्र न्यायालय) द्वारा दोषियों को दी गई उम्रकैद और अन्य सजाओं के खिलाफ दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, साइबर एनालिसिस और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए यह पूरी तरह साबित किया है कि यह फिरौती के लिए रची गई एक सोची-समझी आपराधिक साजिश थी।

बड़ी मां ही निकली थी मास्टरमाइंड

यह सनसनीखेज मामला 20 अप्रैल 2019 का है, जब कश्यप कॉलोनी निवासी कपड़ा व्यापारी विवेक सराफ का मासूम पुत्र विराट सराफ अपने घर के पास दोस्तों के साथ खेल रहा था। पुलिस की तफ्तीश में जो सच सामने आया, उसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया था। इस पूरे अपहरण कांड की मास्टरमाइंड बच्चे की सगी बड़ी मां नीता सराफ ही थी। उसने पैसों के लालच में दलालों और बदमाशों के साथ मिलकर इस पूरी वारदात की रूपरेखा तैयार की थी।

फिल्मी अंदाज में किया था किडनैप, मांगी थी 6 करोड़ की फिरौती

घटना के दिन आरोपी अनिल सिंह ने बच्चे का मुंह बंद किया और उसे वैगन-आर कार सीजी 10 एएम 2818 में राजकिशोर सिंह, हरेकृष्ण और सतीश शर्मा के साथ अगवा कर लिया। इसके बाद आरोपी पुराने बस स्टैंड, शिव टॉकीज चौक और तारबाहर चौक होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां पहले से तय प्लान के मुताबिक आरोपी अनिल सिंह दूसरी डस्टर कार सीजी 04 केआर 5232 के साथ मौजूद था।

आरोपियों ने विराट को डस्टर कार में शिफ्ट किया और जरहाभाटा के पन्ना नगर स्थित राजकिशोर के मकान में ले जाकर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपियों ने बच्चे की आवाज में ही 6 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग का ऑडियो रिकॉर्ड कर पिता को भेजा था। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पन्ना नगर से बच्चे को सकुशल बरामद कर नीता सराफ समेत पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: अपराध की कड़ियां पूरी तरह आपस में जुड़ीं’

  • अपील पर सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने कहा कि सरकारी वकील ने पक्के और भरोसेमंद मौखिक सबूतों, पहचान पत्र, सीसीटीवी फुटेज और साइबर रिपोर्ट से आरोपियों का जुर्म साबित किया है।
  • आवाज के सैंपल हुए मैच: कोर्ट ने आदेश में उल्लेख किया कि मल्टी-स्पीच सॉफ्टवेयर और फोरेंसिक एनालिसिस से यह प्रमाणित हुआ है कि शिकायतकर्ता विवेक सराफ के पास आया फिरौती का कॉल आरोपी राजकिशोर सिंह की ही आवाज का था।
  • अटूट है साक्ष्यों की चेन: अदालत ने माना कि आरोपियों के बीच का मकसद, पहले से रची गई साज़िश, सीसीटीवी में गाड़ियों की मूवमेंट, टावर लोकेशन, आईएमईआई लिंकेज, फिंगरप्रिंट और घटना के बाद का व्यवहार, ये सभी एक ऐसी बिना टूटी चेन बनाते हैं जो केवल और केवल आरोपियों के गुनाह की ओर इशारा करती है।

ट्रायल कोर्ट की सजा बरकरार, एक साथ चलेंगी धाराएं

  1. सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई थी, जिस पर अब हाई कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है
  2. आईपीसी 364-ए/120-बी : आजीवन कारावास और 25,000 रुपये जुर्माना (जुर्माना न देने पर 3 वर्ष की अतिरिक्त सश्रम कैद)।
  3. आईपीसी 120-बी : 14 साल की सजा और 10,000 रुपये जुर्माना।
  4. आईपीसी 363, 365, 368/120-बी: अपहरण और बंधक बनाकर रखने के अलग-अलग मामलों में 7-7 वर्ष की कठोर कैद और जुर्माना। न्यायालय के निर्देशानुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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