बिलासपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राजेश मूणत से जुड़े बहुचर्चित सीडी केस में विनोद वर्मा पर आरोप तय करने सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस केस में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी दोषी माना गया है।
प्रदेश की बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड 2017 और 2018 में सुर्खियों में रहा है। तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत से जुड़े अश्लील क्लिप वाली सीडी को बनाने और बंटवाने के आरोप में पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष भूपेश बघेल और उनके मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
इसके एक दिन पहले भी इसी मामले में एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। यह एफआईआर भाजपा कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई थी।
पहली एफआईआर में डराकर पैसे और संपत्ति वसूलने का आरोप लगाया गया था, जबकि दूसरी एफआईआर में आईटी एक्ट के तहत अश्लील वीडियो वायरल करने का आरोप था।
एफआईआर के बाद 26-27 अक्टूबर 2017 की रात को गाजियाबाद में विनोद वर्मा के घर पर पुलिस की रेड हुई थी और उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके विरोध में दूसरे दिन 27 अक्टूबर 2017 को भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें कथित सीडी को पत्रकारों को बांटा गया था।
सीबीआई जांच के लिए सौंप दिया था मामला
बाद में दोनों एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई तय समय में कोर्ट में चार्जशीट (चालान) पेश नहीं कर पाई, जिसके कारण विनोद वर्मा को दिसंबर 2017 में करीब 63 दिन बाद जमानत मिल गई।
इसके बाद अक्टूबर 2018 में सीबीआई ने जो चालान पेश किया, उसमें विनोद वर्मा और भूपेश बघेल के साथ-साथ भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका, विजय पांडे और भिलाई के व्यापारी विजय भाटिया को भी आरोपी बनाया गया था।
झूठी रिपोर्ट के आधार पर पड़ा था छापा
हाईकोर्ट में शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान विनोद वर्मा की ओर से वकीलों ने कहा कि सीबीआई ने अपने चार्जशीट में खुद माना है कि जिस रिपोर्ट के आधार पर उनके घर छापा मारा गया था, वह रिपोर्ट झूठी थी और रिपोर्ट करने वाले प्रकाश बजाज ने भी इसे स्वीकार किया है।
इसके साथ ही वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका और उनके साथी विजय पांडेय व रिंकू खनूजा ने मुंबई में एक अश्लील सीडी बनवाई थी, जिसमें तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत का चेहरा जोड़ दिया गया था।
आरोपों को बताया गलत, बरी करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि यह सीडी अगस्त 2017 में बनाई गई थी और इसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के ओएसडी अरुण बिसेन को भी थी। उन्होंने मुंबई जाकर यह सीडी देखने की बात भी स्वीकार की है। इसी कारण राजेश मूणत की नकली अश्लील सीडी बनाने का आरोप उन पर नहीं मढ़ा जा सकता।
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि अगर उस सीडी को असली मानकर पत्रकारों को दे दिया, तो इसे आम जनता में अश्लील सामग्री फैलाने का अपराध नहीं माना जा सकता। इन सभी दलीलों के आधार पर याचिका में कहा गया है कि लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और उन्हें इस मामले में पूरी तरह बरी किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने भूपेश बघेल पर भी किया है आरोप तय
रायपुर की निचली अदालत ने विनोद वर्मा की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और सीबीआई के तर्कों को सही माना। कैलाश मुरारका द्वारा बनाए गए आपराधिक षड्यंत्र में वह किस स्तर पर शामिल हुए यह महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि अपराध की कड़ियां एक दूसरे से जुड़ती हैं, इसलिए उन्हें भी इस मामले में आरोपी माना गया है।
इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भूपेश बघेल को आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन बाद में सत्र न्यायालय ने उस फैसले को बदलते हुए उनके खिलाफ भी आरोप तय कर दिए हैं।






