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*बिलासपुर में सुशासन तिहार के दौरान लोगों ने उठाई मकान और जमीन पट्टे की मांग*

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बिलासपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़)  सुशासन तिहार का जो रिपोर्ट कार्ड सामने आया है, उसने सरकारी दावों के बीच मैदानी हकीकत को साफ कर दिया है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, शहर से लेकर गांवों तक जनता सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री आवास, पट्टा वितरण, सीमांकन और बिजली-पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है । कुल प्राप्त आवेदनों में से अब भी चार हजार से अधिक फाइलें दफ्तरों में अटकी हैं ।

सुशासन तिहार के रिपोर्ट कार्ड के विश्लेषण से साफ है कि जनता की सबसे बड़ी जरूरत सिर छुपाने के लिए छत की है। अकेले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल हाउसिंग बोर्ड में आवास की मांग को लेकर 80 से ज्यादा आवेदन पहुंचे। वहीं नगर निगम क्षेत्र की जनता ने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना के तहत पट्टा वितरण, साफ-सफाई तथा पानी सप्लाई को दुरुस्त करने की सबसे ज्यादा मांग की, जिसके चलते निगम में सर्वाधिक 1,820 आवेदन पहुंचे हैं।

राजस्व में ग्रामीण क्षेत्रों से आए आवेदनों में राजस्व से जुड़े मामलों का सबसे ज्यादा दबदबा रहा। मस्तुरी, बेलगहना और तखतपुर जैसी बड़ी तहसीलों में जनता ने जमीन विवाद, सीमांकन, ऋणापुस्तिका और नामांतरण के मामलों में आ रही दिक्कतों को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज कराईं । अकेले मस्तुरी तहसील में 581 और बेलगहना में 301 राजस्व मामले सामने आए, जो दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसानों की परेशानी को दर्शाते हैं। अगर निराकरण के प्रतिशत की बात करें, तो रिपोर्ट कार्ड के अनुसार जिले में कुल 12,311 आवेदन प्राप्त हुए थे । इनमें से प्रशासन अब तक केवल 7,983 मामलों लगभग 65 प्रतिशत का ही निपटारा कर पाया है, जबकि 4,328 फाइलें लगभग 35 प्रतिशत अब भी विभिन्न विभागों में पेंडिंग पड़ी हुई हैं।

बिजली कटौती से त्रस्त रही ग्रामीण जनता

सुशासन तिहार के रिपोर्ट कार्ड में बिजली विभाग की बदहाली भी खुलकर सामने आई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर विद्युत वितरण कंपनी के पास कुल 361 आवेदन पहुंचे। ग्रामीण इलाकों में बार-बार हो रही अघोषित कटौती और ट्रांसफार्मर खराब होने की शिकायतों को लेकर ग्रामीणों ने सबसे ज्यादा आक्रोश जताया।

फिसड्डी विभागों की सूची तैयार

कलेक्ट्रेट ने कम निराकरण प्रतिशत वाले विभागों को चिन्हित कर लिया है । जनपद पंचायत बिल्हा में 1,690 और तखतपुर में 984 आवेदनों के साथ ग्रामीण विकास के काम सबसे ज्यादा अटके हैं । कलेक्टर ने इन विभागों के प्रभारियों को चेतावनी दी है कि लंबित मामलों को तुरंत क्लियर करें।

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