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*रायपुर,,12 साल का जश्न मनाने से पहले,12 वादों का हिसाब देना जरूरी है,,,इकराम अहमद*

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मोदी सरकार के 12 वर्ष: अधूरे वादों पर जनता के सवाल – इकराम अहमद

रायपुर,, सियासत दर्पण न्यूज़,,बिरगांव/रायपुर।
भारत सरकार द्वारा 12 वर्ष पूर्ण होने पर जहां एक ओर जश्न और उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की आम जनता के मन में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिक निगम बिरगांव के एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने कहा कि यह केवल उत्सव का समय नहीं, बल्कि जनता से किए गए वादों का हिसाब देने का समय भी है।
मुख्य अधूरे वादों पर सवाल
रोजगार का वादा – युवाओं के साथ अन्याय
हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी लाखों युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
बेरोजगारी दर चिंता का विषय बनी हुई है
युवाओं को सपने दिखाए गए, लेकिन अवसर नहीं दिए गए।
काला धन –सिर्फ जुमला?
विदेशों से काला धन लाकर हर खाते में ₹ 15 लाख देने का वादा किया गया।
आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया
यह वादा जनता को गुमराह करने वाला जुमला साबित हुआ।
किसानों की आय – वादा अधूरा
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही गई थी।
किसान आज भी कर्ज और लागत की मार झेल रहे हैं
खेती महंगी हुई लेकिन आमदनी नहीं बढ़ी जिससे किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हुआ।
महंगाई – आम आदमी पर बोझ
पेट्रोल, डीजल, और गैस सस्ती करने का दावा किया गया था।
लेकिन पट्रोल, डीजल 100 के पार गैस सिलेंडर 1015 रुपये पहुंचा ,लगातार कीमतों में वृद्धि
महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी।
आवास योजना – अधूरा सपना
2022 तक सभी को पक्का मकान देने का वादा किया गया।
लाखों लोग आज भी इंतजार में
जमीनी स्तर पर योजनाएं धीमी और अधूरी।
गंगा सफाई – अधूरी मुहिम
“नमामि गंगे” के तहत गंगा को स्वच्छ बनाने का वादा किया गया।
भारी बजट के बावजूद परिणाम संतोषजनक नहीं।
स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंडिया – सीमित असर
देश को डिजिटल और आधुनिक बनाने का वादा किया गया।
कुछ शहरों तक सीमित विकास
ग्रामीण भारत आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित।
महिला सुरक्षा – चिंता बरकरार
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा किया गया।
अपराध के मामले लगातार सामने आते हैं- कानून सख्त हैं, लेकिन जमीन पर असर कमजोर।
“12 साल का जश्न मनाने से पहले, 12 वादों का हिसाब देना जरूरी है।
विकास के दावे तभी सार्थक हैं, जब हर वर्ग को उसका लाभ मिले।
आज जनता सवाल पूछ रही है — और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।”

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