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*ब्रांडेड के नाम पर जेलों में महंगा सामान सप्लाई*

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रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ की जेलों में सरकारी खरीद को पारदर्शी बनाने के लिए लाई गई ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) प्रणाली अब विवादों के घेरे में है। व्यापारी महेश आहूजा ने रायपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक को आवेदन देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, जेल के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से चारू सप्लायर और साईं ट्रेडर्स जैसे वेंडर्स सिंडिकेट चला रहे हैं।

शिकायत में दावा किया गया है कि रायपुर और बिलासपुर जेल में एक ही सामग्री की दरों में जमीन-आसमान का अंतर है। ब्रांड का फर्जी लेबल लगाकर कैदियों के उपयोग की सामान्य खाद्य सामग्रियों को अत्यधिक ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। आहूजा ने बताया कि पारदर्शिता के नाम पर शुरू की गई कस्टम बिड व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है।

टेंडर की शर्तों में बदलाव का जिक्र

शिकायतकर्ता ने टेंडर की शर्तों में बदलाव का भी जिक्र किया गया है। आहूजा के अनुसार जेल महानिदेशक और राज्य सरकार ने इस मामले में तुरंत कदम नहीं उठाए, तो वे केंद्र सरकार तक शिकायत पहुंचाएंगे।

मेनुअल बंद फिर भी उल्लंघन

आवेदन में आहूजा ने बताया कि जेल अधिनियम 1968 में मैन्युअल टेंडर प्रक्रिया बंद कर जेम टेंडर अनिवार्य किया गया था परंतु, चारू सप्लायर और साईं ट्रेडर्स जैसे वेंडर्स जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित संरक्षण में टैक्स चोरी और सिंडिकेट चला रहे हैं। केंद्रीय मंत्री द्वारा पारदर्शिता के लिए शुरू की गई कस्टम बिड व्यवस्था को किनारे कर क्यू 3 और क्यू 4 का दुरुपयोग करते हुए चुनिंदा वेंडरों को प्राथमिकता दी जा रही है। यहां तक कि 13 व 15 जून 2026 को हुए पेपर व मसाले के टेंडर में भी ऐसी शर्तें थोप दी गईं,जिससे चुनिंदा वेंडरों को टेंडर मिल जाएं।

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