सियासत दर्पण न्यूज़ चैनल से बिलासपुर ब्यूरो चीफ़ डॉ शाज़िया अली की रिपोर्ट
पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया, कई और डॉक्टर जांच के घेरे में
बिलासपुर,,सियासत दर्पण न्यूज़,, स्नेक बाइट (सर्पदंश) से मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा दिलाने के बहुचर्चित फर्जीवाड़े में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर दो मामलों में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शाने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई तोरवा थाना क्षेत्र में दर्ज मामले की जांच के दौरान हुई। पुलिस के अनुसार तहसील कार्यालय के नायब नाजीर की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत की जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था और कथित तौर पर सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसके आधार पर मुआवजा लेने की प्रक्रिया अपनाई गई।
पहले ही जेल जा चुके हैं रिश्तेदार और वकील
इस मामले में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी तथा अधिवक्ता रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अब भी फरार हैं। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है।
सिविल लाइन थाने में भी दर्ज है एक और मामला
डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी एक अलग मामला दर्ज है। आरोप है कि तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश बताया गया था, जबकि जांच में वास्तविक कारण हार्ट अटैक सामने आया। इस मामले में मृतक की पत्नी सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। अब सिविल लाइन पुलिस डॉक्टर को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।
दो दिन पहले चार और आरोपी गिरफ्तार
इससे पहले 16 जुलाई को सरकंडा थाना पुलिस ने फर्जी स्नेक बाइट के पांच मामलों में कार्रवाई करते हुए अधिवक्ता हीराप्रसाद खाण्डेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेन्द्र कुमार तथा तहसीलदार कार्यालय के दैनिक वेतनभोगी चालक गोविंद विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
2025 में भी सामने आया था ऐसा मामला
यह पहली बार नहीं है जब डॉ. प्रियंका सोनी का नाम ऐसे मामले में सामने आया हो। वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के मामले में भी उन्हें, मृतक के परिजनों और एक वकील के साथ गिरफ्तार किया गया था।
15 मामलों की जांच, कई डॉक्टरों पर संदेह
पुलिस के अनुसार जिले में सर्पदंश से फर्जी मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा लेने के 15 मामलों की जांच जारी है। सभी मामलों की समीक्षा कर दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। जांच के दायरे में सिम्स के 4 से 5 डॉक्टर भी हैं, जिन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का संदेह है। कुछ चिकित्सकों से पूछताछ हो चुकी है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित घोटाले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
इस पूरे मामले ने सरकारी मुआवजा व्यवस्था, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सियासत दर्पण न्यूज़ चैनल से बिलासपुर ब्यूरो चीफ़ डॉ शाज़िया अली की रिपोर्ट






