रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैलने लगा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई हैं। प्रदेश भर में अब तक मलेरिया के 8,426 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं, और यह संक्रमण मुख्य रूप से वनांचल क्षेत्रों में पैर पसार रहा है।
विशेष रूप से कांकेर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां महज 13 दिनों के भीतर मलेरिया से पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार की कथित लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है और मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
कवर्धा और बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों में भी फैला संक्रमण
मलेरिया के बढ़ते मामलों से कवर्धा और बिलासपुर के ग्रामीण अंचलों में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। कवर्धा के बैगा बहुल गांव मुड़वाही और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले 15 दिनों से मलेरिया का प्रकोप देखा जा रहा है।
कई ग्रामीणों में हुई पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जांच अभियानों में अब तक 40 से 45 ग्रामीणों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इस संक्रमण के कारण पांच लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन विभाग ने इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी तरह बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में भी एक 37 वर्षीय महिला की मलेरिया से मौत हो चुकी है, जबकि एक 17 वर्षीय छात्र की मौत भी फाल्सीपेरम मलेरिया के संदेह के दायरे में है।
सरकारी आंकड़ों में घट रही परजीवी दर
एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़े स्थिति में सुधार का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात पूरी तरह से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2000 में मलेरिया की वार्षिक परजीवी दर (एपीआइ) 16.80 थी, जो घटकर 2020 में 1.17 और वर्ष 2025 में 0.90 पर आ गई थी, तथा वार्षिक मौतें भी 63 से घटकर 12 दर्ज की गई थीं। इसके बावजूद, वर्तमान में लगातार सामने आ रही मौतों और बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमला सक्रिय हो गया है। संक्रमण की रोकथाम के लिए घर-घर जाकर मलेरिया की स्क्रीनिंग, आवश्यक दवाओं का वितरण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
जागरूकता शिविर कर रहे आयोजित
मौतों और संक्रमण को देखते हुए वनांचल क्षेत्रों में घर-घर जाकर मलेरिया जांच (स्क्रीनिंग), दवा वितरण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। वर्जन सभी क्षेत्रों में मलेरिया के संदिग्ध लोगों की स्वास्थ्य विभाग को जांच करने के लिए कहा गया है। जहां भी इस तरह के प्रकरण मिल रहे हैं, उनका त्वरित इलाज कराया जा रहा है।
– श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़






