भिलाई।(सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉड्रिंग मामले की जांच अब दुर्ग में पूर्व पटवारी संघ प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह राजपूत के परिवार तक पहुंच गई है।
मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) की टीम ने दुर्ग के सिकोला भाठा स्थित बंगाली कॉलोनी में राजपूत के निवास पर दबिश दी। करीब आठ अधिकारियों की टीम दो वाहनों से पहुंची और घर में दस्तावेजों तथा विभिन्न रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
चर्चा में आए परिवार के रिकॉर्ड
कमलेश सिंह राजपूत लंबे समय तक पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। ईडी की कार्रवाई के बाद उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राजपूत की दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं।
हालांकि, इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिवार में दीपाली राजपूत उपपंजीयक, निवेदिता राजपूत पटवारी, उरला क्षेत्र में पदस्थ स्वप्निल सिंह राजपूत पटवारी तथा योगेश सिंह राजपूत नायब तहसीलदार बताए जा रहे हैं। योगेश सिंह राजपूत की नायब तहसीलदार के रूप में पदस्थापना संबंधी जानकारी पूर्व के शासकीय आदेशों पर आधारित रिपोर्टों में भी सामने आ चुकी है।
नियुक्तियों से लेकर संपत्तियों तक जांच का दायरा
ईडी की कार्रवाई के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों के साथ उनकी आर्थिक स्थिति और संपत्ति में समय के साथ हुए बदलाव क्या रहे हैं। जांच एजेंसी यदि इस दिशा में आगे बढ़ती है तो कमलेश सिंह राजपूत, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम दर्ज जमीन, मकान, प्लॉट तथा अन्य अचल संपत्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषकर जिन क्षेत्रों में राजपूत स्वयं पटवारी के रूप में पदस्थ रहे और बाद में उनके परिवार के सदस्यों की पदस्थापना हुई, वहां की संपत्तियों के दस्तावेज, खरीद की तारीख, रजिस्ट्री मूल्य और आय के स्रोतों का मिलान जांच का हिस्सा बन सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों और संपत्तियों को जांच के संभावित पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाणित दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिसमें कमलेश सिंह राजपूत, उनकी पत्नी या उनके बच्चों के नाम की संपत्तियों की पूरी सूची, रकबा अथवा बाजार मूल्य का आधिकारिक विवरण जारी किया गया हो। ऐसे में किसी संपत्ति को अवैध या आय से अधिक बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।
दस्तावेजों की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
सीजीपीएससी मामले में ईडी की कार्रवाई राज्य में कई स्थानों पर हुई है। दुर्ग में कमलेश सिंह राजपूत के घर हुई कार्रवाई में मिले दस्तावेजों से यदि नियुक्तियों, लेन-देन अथवा संपत्तियों को लेकर कोई कड़ी सामने आती है तो जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है। फिलहाल ईडी की ओर से कमलेश सिंह राजपूत या उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ किसी निष्कर्ष अथवा आरोप की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।





