Home / राजधानी / *4000 करोड़ के बजट से बदलेंगे गांव, मिलेगा ज्यादा काम*

*4000 करोड़ के बजट से बदलेंगे गांव, मिलेगा ज्यादा काम*

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने के लिए विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। मिशन के तहत अनुमेय कार्यों की संख्या अब 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है।

4000 करोड़ का बजट, 3354.85 करोड़ का अंतरिम आवंटन

उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कार्यों की संख्या बढ़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कार्यों की संख्या 375 होने से विकास को गति मिलेगी और ग्रामीण विकास मजबूत होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने मिशन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका लाभ सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में ऐसी संपत्तियां बनेंगी जो आने वाले सालों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन दिया है। मिशन के तहत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है।

विकसित भारत 2047 में गांवों को केंद्रीय इकाई बनाया गया

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई माना है। वीबी-जीरामजी के जरिए रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

4 श्रेणियों में बंटे 375 काम, क्यूआर कोड से मिलेगी जानकारी

विजय शर्मा ने बताया कि वीबी-जीरामजी के 375 कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें 68 तरह के व्यक्तिगत कार्य, 99 तरह के मरम्मत और रखरखाव के कार्य तथा समूह और सामुदायिक उपयोग से जुड़े कार्य शामिल हैं। हर ग्रामीण तक जानकारी पहुंचाने के लिए राज्य में क्यूआर कोड जारी किया गया है, जिससे कार्यों की पूरी डिटेल मिल सकेगी।

2027 तक हर बालिका के लिए स्कूल में शौचालय का लक्ष्य

मिशन में सरकारी स्कूलों की अधोसंरचना को खास महत्व दिया गया है। स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कमरों का निर्माण, लैब, रसोई शेड, बाउंड्री वॉल और खेल मैदान जैसे काम किए जा सकेंगे।

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान चल रहा है। इसके तहत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में 6,671 बालिका शौचालय बनाए जाएंगे। यह पहल बालिकाओं की गरिमा और स्वच्छता के लिए अहम कदम है।

हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय बनाने का संकल्प

राज्य सरकार ने हर गांव में मुक्तिधाम बनाने का संकल्प लिया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जा रहे हैं। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट और अन्य सामुदायिक अधोसंरचना के निर्माण और मरम्मत को भी अनुमेय किया गया है। जल संरक्षण के लिए 10 हजार से अधिक बंद और डिफंक्ट बोरवेल में सैंड फिल्टर और रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे।

जल सुरक्षा से लेकर भूजल पुनर्भरण तक होंगे काम

पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के कार्य हैं। इसमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, माइक्रो और ड्रिप सिंचाई चैनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण, पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसे काम शामिल हैं।

सड़क, स्कूल, पंचायत भवन और स्वच्छता की अधोसंरचना मजबूत होगी

दूसरी श्रेणी ग्रामीण अधोसंरचना की है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया, क्रॉस-ड्रेनेज, ग्राम संपर्क सुविधाएं, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, सार्वजनिक भवन, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान शामिल हैं। साथ ही श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, सौर लाइट, बायोगैस प्लांट, पार्किंग शेड और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण तथा जल जीवन मिशन की संपत्तियों की मरम्मत भी इसमें है।

आजीविका और स्थानीय आय के अवसर बढ़ेंगे

तीसरी श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसमें प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट, साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न और कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, कृषि मूल्य श्रृंखला की संरचनाएं, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी, पशु आश्रय, मत्स्य पालन, नर्सरी और भवन निर्माण सामग्री उत्पादन से जुड़े कार्य शामिल हैं। कृषि आधारित प्रसंस्करण जैसे मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और बांस शिल्प की अधोसंरचना भी विकसित होगी।

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा सहारा

स्व-सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह स्तर की गतिविधियों को अनुमेय करने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को जगह और सुविधा मिलेगी। वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, नर्सरी, भंडारण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से आय के नए स्रोत बनेंगे।

आपदा और चरम मौसम से निपटने के लिए भी होंगे कार्य

चौथी श्रेणी में आपदा और अति विषम मौसम से निपटने के कार्य शामिल हैं। इसमें चक्रवात आश्रय, बाढ़ आश्रय, तटबंध, गेबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, टेरेस निर्माण, आपदा के बाद सड़कों और सामुदायिक संपत्तियों का पुनर्स्थापन, विंडब्रेक पौधरोपण और वन अग्नि प्रबंधन जैसे कार्य हैं। वन अग्नि प्रबंधन में फायर ब्रेक हेज, वन अग्नि रेखा और फ्यूल बफर जोन बनाए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वीबी-जीरामजी सिर्फ रोजगार देने का माध्यम नहीं है, बल्कि गांवों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करने का बड़ा अवसर है।

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page