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*पटवारियों की हड़ताल से धान खरीदी पर संकट, राजस्व व्यवस्था चरमराई – विनोद चंद्राकर*

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महासमुंद,, सियासत दर्पण न्यूज़। पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन श्री विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार की नीतियों को जनविरोधी और हर वर्ग के लिए नुकसानदायक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मनमानी और अव्यवहारिक आदेशों के चलते प्रदेश हड़तालों का गढ़ बनता जा रहा है और इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ऐन धान खरीदी के पहले हर साल किसानों को किसी न किसी बहाने परेशान किया जाता है।
पूर्व विधायक ने कहा कि राजस्व पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से पूरे प्रदेश में जमीनी राजस्व व्यवस्था ठप हो गई है। पटवारी राजस्व विभाग के नए पीवी ऐप अर्थात फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप के जरिए डिजिटल सर्वे और जीपीएस फोटो अपलोड करने की बाध्यता का विरोध कर रहे हैं। इस ऐप में लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं, सर्वर डाउन रहना, लोकेशन मैच न होना और फसलों के भौतिक सत्यापन में व्यवहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। पटवारी संघ पहले ही सरकार को इन दिक्कतों से अवगत करा चुका था, लेकिन गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। यह विरोध जायज है।
उन्होंने कहा कि इसका सबसे बुरा असर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों पर पड़ रहा है। धान खरीदी के लिए पंजीयन का काम चल रहा है, लेकिन फौती काटना बंद होने और रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने से किसान चक्कर लगा रहे हैं। पटवारी प्रतिवेदन के बिना तहसीलदार और एसडीएम कार्यालयों में राजस्व के प्रकरण लंबित हो गए हैं। धारा 115 के तहत लाखों प्रकरण शीर्ष कार्यालयों में पहले से लंबित हैं और अब नए प्रतिवेदन शीर्ष तक नहीं पहुंच रहे। फौती, नामांतरण, बंटवारा और त्रुटि सुधार के लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में यदि रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुआ तो कई किसानों को धान बेचने से भी वंचित होना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं छात्रों को भी जाति, मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि वह तकनीकी बाध्यता को तत्काल स्थगित कर पटवारियों से वार्ता करे और किसानों के हित में गिरदावरी और पंजीयन की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, अन्यथा धान खरीदी की पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी और फसल नुकसान का सर्वे भी नहीं हो पाएगा।

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