Home / राजधानी / *हौसले की उड़ान: नक्सली हमले में पैर गंवाने वाले CRPF जवान टोमन ने जीता एशियन पैरा गोल्ड*

*हौसले की उड़ान: नक्सली हमले में पैर गंवाने वाले CRPF जवान टोमन ने जीता एशियन पैरा गोल्ड*

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रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) फरवरी 2022 में माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान आइईडी विस्फोट में एक पैर गंवा दिया, लेकिन हौसला नहीं टूटा। व्हीलचेयर से कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा खड़े हुए और फिर हाथों में धनुष थामकर अपने जीवन को नई दिशा दी।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के टोमन कुमार की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि मुश्किलों के सामने हार न मानने वाले जज्बे की मिसाल है। कभी देश की सुरक्षा के लिए बंदूक थामने वाले टोमन आज तीरंदाजी में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्व चैंपियन बनने के बाद उन्होंने पैरा एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है।

ऑपरेशन के दौरान बदली जिंदगी

बालोद जिले के अहिबर नवागांव निवासी टोमन कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा बटालियन में जवान थे। फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले के पेशरार थाना क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन डबल बुल के दौरान वह प्रेशर आइईडी की चपेट में आ गए। विस्फोट में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा।
देश की सेवा करते हुए मिले इस जख्म ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। लंबे इलाज और पुनर्वास के दौरान उन्हें शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। व्हीलचेयर पर निर्भरता के बाद कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा खड़े होना अपने आप में बड़ी परीक्षा थी।

दर्द से उबरकर थामा धनुष

टोमन ने परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय खुद को फिर से तैयार करने का फैसला किया। नवंबर 2023 में उन्होंने पैरा तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया। एक पैर के सहारे शरीर का संतुलन बनाना, निशाना साधना और घंटों अभ्यास करना आसान नहीं था। हर दिन उन्हें अपनी शारीरिक सीमाओं को चुनौती देनी पड़ती थी, लेकिन उन्होंने हादसे को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। मेहनत रंग लाई और सितंबर 2024 में उनका चयन सीआरपीएफ की केंद्रीय तीरंदाजी टीम में हो गया।

विश्व चैंपियन से एशियाई स्वर्ण तक का सफर

सितंबर 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में टोमन ने पुरुष कंपाउंड ओपन व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही वह पैरा तीरंदाजी में विश्व चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पुरुष तीरंदाज बने। अप्रैल 2026 में बैंकाक पैरा तीरंदाजी सीरीज में उन्होंने कंपाउंड पुरुष टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में भी स्वर्ण पदक जीते।
अब पैरा एशियाई खेलों में टोमन ने शीतल देवी के साथ कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया को 151-148 से हराकर खिताब अपने नाम किया। क्वालीफाइंग दौर में दोनों ने 1402 अंक बनाकर विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया। यह जीत टोमन के उस संघर्ष का परिणाम है, जिसमें उन्होंने शारीरिक चुनौती को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर बनाया।
टोमन का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी मुश्किल के बाद जिंदगी से उम्मीद छोड़ने लगते हैं। उन्होंने अपना एक पैर खोया, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता नहीं। वर्दी में देश की सुरक्षा के लिए जुटे रहने वाले टोमन अब खेल के मैदान में तिरंगे की शान बढ़ा रहे हैं।

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