रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) रायपुर के शास्त्री चौक स्थित HDN परिसर में छत्तीसगढ़ के दूर-दराज इलाकों से लोग अस्थमा और सांस की परेशानी के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटी की औषधि लेने पहुंचे। नत्थानी परिवार 160 साल से ज्यादा समय से निशुल्क औषधि बांट रहा है।
विनय नत्थानी के मुताबिक, औषधि तैयार करने के लिए जड़ी-बूटियों की छाल सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है। फिर छोटी-छोटी पुड़ियां तैयार की जाती हैं। इस साल करीब 2 हजार लोग औषधि ले चुके हैं।
आधी रात को खीर में मिलाकर लेते हैं औषधि
परंपरा के अनुसार, औषधि को खीर में मिलाकर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। आधी रात को इसे खाने की परंपरा है। औषधि लेने वालों को तीन महीने तक तेल, मिर्च, गुड़, खटाई और मांसाहारी भोजन से परहेज की सलाह दी जाती है। अस्थमा ठीक होने के दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
71 साल के रघुवीर बोले- रातभर आती थी खांसी
दुर्ग निवासी रघुवीर यादव ने बताया कि उन्हें पहले अस्थमा की परेशानी थी। रातभर खांसी आती थी और सांस लेने में दिक्कत होती थी। वे 25 से 30 साल से इस परंपरा के तहत औषधि लेने आ रहे हैं।
501 किलो दूध से बनी खीर बांटी
रायपुर के राठौर चौक स्थित श्री मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर में 501 किलो दूध से खीर तैयार की गई। इसमें 80 किलो ड्राईफ्रूट और बादशाह भोग चावल मिलाया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद बांटा गया।






