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*‘अपने बुद्धिदाता’ के कृत्यों के लिए माफी मांगे कांग्रेसः योगी*

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लखनऊ । (सियासत दर्पण न्यूज़) सैम पित्रोदा के बयान की भर्त्सना करते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस को अपने बुद्धिदाता के कृत्य के लिये सार्वजनिक रुप से देश की जनता से माफी मांगनी चाहिये। श्री योगी ने कहा कि पित्रोदा कांग्रेस की बांटो और राज करो की नीति को बयां कर रहे हैं। कांग्रेस में सत्ता प्राप्ति की अतिलिप्सा है। कांग्रेस 1947 में भारत के विभाजन की त्रासदी की जिम्मेदार है। कांग्रेस ने आजादी के बाद भी जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर देश को बांटने का पाप किया है। सैम पित्रोदा का बयान अत्यंत निंदनीय है। कांग्रेस सैम पित्रोदा के मुंह से जो बोलवा रही है, उसके लिए उसे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को अपने बुद्धिदाता के कृत्यों के लिए माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लोग उत्तर भारत, दक्षिण भारत, पूर्वी भारत, पश्चिमी भारत को रंग व चमड़ी के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे हैं। यह देश के प्रति साजिश का पर्दाफाश होने के साथ ही कांग्रेस की बहुत खतरनाक मंशा है। यह शर्मनाक और निंदनीय बयान भारत जैसे सनातन देश में 140 करोड़ भारतवासियों को अपमानित करने वाला है। उन्होंने कहा कि सैम पित्रोदा अपनी बुद्धि अपने पास ही रखें। उनके जैसे बुद्धिमान लोग कांग्रेस को मुबारक हों। राष्ट्रवादी राम और राष्ट्र को एक-दूसरे के पूरक मानते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम भारत राष्ट्र के सांस्कृतिक एकता के आधार हैं। भारत का मूल चरित्र राम की चेतना से नई संजीवनी प्राप्त करता है। भारत के हर परिवार में श्रीराम मर्यादा के आदर्श माने गए हैं। राम भारत की सांस्कृतिक और राजनीति एकता के प्रतीक हैं। इसमें गरीब कल्याण, सबका साथ-सबका विकास, सर्वे सन्तु निरामया का भाव निहित है। इसकी मूल चेतना प्रभु श्रीराम से प्राप्त होती है, इसलिए राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए गौरव का विषय है। जिनका भारत और भारतीयता पर विश्वास नहीं है और जिन्हें अच्छे कार्य में शर्मिंदगी महसूस होती है। ईश्वर करे कि उन्हें यह शर्मिंदगी हमेशा मिलती रहे। योगी ने कहा कि भारत के 140 करोड़ लोगों के साथ ही दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी निवास करते हैं। दुनिया में जहां कहीं भी मानवता के कल्याण के पक्षधर हैं, वह हर व्यक्ति राम मंदिर के निर्माण से आनंदित व प्रफुल्लित है। इसके जरिए उन्हें बहुत पॉजीटिव एनर्जी भी प्राप्त हुई है। यही कारण है कि न केवल सनातन धर्मावलंबी, बल्कि दुनिया के दर्जनों राजदूत अयोध्या की यात्रा कर वहां के विकास कार्यों को देख चुके हैं। यह निरंतरता आगे चलती रहेगी।

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