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*पहले योग्यता नहीं बल्कि पहुंच और पैसे से मिलती थी नौकरीः योगी*

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लखनऊ।(सियासत दर्पण न्यूज़) समाजवादी पार्टी (सपा) पर परोक्ष रुप से निशाना साधते हुये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी में नियुक्ति का मानक योग्यता नहीं बल्कि पैसा और पहुंच हुआ करता था।

श्री योगी ने यहां नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहा कि कुछ अभ्यर्थियों ने 2017 के पहले भी आवेदन किया होगा। सक्षम व समर्थ होने के बावजूद सिर्फ इसलिए चयन नहीं हुआ होगा, क्योंकि उनकी पहुंच और अभिभावक के पास इतना पैसा नहीं था कि नियुक्ति करा सकें। सब कुछ होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था, लेकिन पिछले सात-साढ़े सात वर्ष में चयन प्रक्रिया में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ। हमारी सरकार में सरकारी, निजी क्षेत्र और संविदा के आधार पर नियुक्तियां ईमानदारी से बढ़ीं तो यूपी हर क्षेत्र में तेजी से दौड़ता दिखाई दे रहा है।

श्री योगी ने उम्मीद जताई कि जितनी निष्पक्षता व पारदर्शिता से नियुक्ति मिली है, पूरा कार्यकाल इसी निष्पक्षता व पारदर्शी तरीके से बढ़ता जाएगा तो यूपी भारत की नंबर एक की अर्थव्यवस्था और भारत 2047 में विकसित व आत्मनिर्भर बनेगा।

भर्ती प्रक्रिया के तहत गुरुवार को 1950 नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया गया इसमें उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 1526 ग्राम पंचायत अधिकारी, 360 ग्राम विकास अधिकारी (समाज कल्याण), 64 समाज समाज कल्याण पर्यवेक्षक चयनित किए गए हैं।

उन्होने कहा कि साढ़े सात वर्ष में हमारी सरकार ने सरकारी सेवाओं में लगभग 7 लाख भर्ती संपन्न की है। प्रदेश के अंदर सुरक्षा का बेहतर माहौल देने के कारण निजी क्षेत्र में भी लाखों नौजवानों के लिए नौकरी की संभावना बढ़ाई गईं। प्रदेश का युवा पहले नौकरी-रोजगार के लिए देश-दुनिया में भटकता था। आज उसे अपने प्रदेश, क्षेत्र व जनपद में नौकरी मिल रही है। वह घर के कार्यों के साथ-साथ सर्विस और परिवार की देखभाल भी कर रहा है। जिन ग्राम पंचायत राज अधिकारियों व पंचायतीराज विभाग से जुड़े अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उन्हें कमोबेश नियुक्ति पत्र उसी जनपद में प्राप्त हुआ है, जहां के वे निवासी हैं।

योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के अंदर समग्र विकास के लिए जो रूपरेखा तैयार की थी। उसमें भर्ती प्रक्रिया भी पारदर्शी तरीके से हो सके, यह उसका प्रमुख भाग था, क्योंकि अच्छे, सक्षम व योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं होगा तो सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए जिस तंत्र को कार्य करना है, वह स्वयं पैरालाइज हो जाएगा। ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए 2017 में ही तय किया गया कि जितने भी आयोग व बोर्ड हैं, वह निष्पक्षता व पारदर्शी तरीके से आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए भर्ती प्रक्रिया संपन्न करें।

उन्होने कहा कि राष्ट्रपिता के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने की आधारभूत इकाई ग्राम पंचायत है। पीएम मोदी ने लक्ष्य प्रस्तुत किया है कि देश जब 2047 में आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब हमें आत्मनिर्भर व विकसित भारत चाहिए। इसके लिए जो नींव आज आप रखेंगे, उसी पर आत्मनिर्भर व विकसित भारत की आधारशिला बनने वाली है। हमारी ग्राम पंचायतें भी उसकी आधारशिला हैं। इसके लिए पंचायतीराज विभाग ने बहुत सारे कार्य पहले ही किए हैं। 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों को 29 प्रकार के कार्यों करने के लिए डेलीगेट किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ग्राम पंचायत के पास अपना भवन नहीं था। ग्राम प्रधान घर से कार्य करता था। इसका परिणाम होता था कि कई बार कार्ययोजना बनती ही नहीं थी तो काम भी नहीं हो पाता था। अंतिम वर्ष में किसी प्रकार कुछ योजना बना ली, यदि वह इंप्लिमेंट हो गई तो ठीक, वरना पैसा लैप्स होता था पर अब ऐसा नहीं होने वाला। अब यूपी के 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय लगभग बन चुके हैं। इनमें ऑप्टिकल फाइबर, इंटरनेट, वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। ग्राम पंचायत सहायक के रूप में कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त किया जा चुका है। गांव से जुड़ी समस्या का समाधान गांव में ही मिले। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र आदि सुविधाएं वहीं ऑनलाइन प्राप्त हों। प्रधान व अन्य लोगों के साथ बैठकर ग्राम पंचायत की साल भर की कार्ययोजना तैयार की जाए। केवल केंद्रीय व राज्य वित्त की धनराशि से ही विकास कार्यों को बढ़ा सकें, ऐसा न हो। खुद के रिसोर्स और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारे स्तर पर क्या प्रयास हो सकते हैं, यह भी देखना होगा।

योगी ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में आत्मनिर्भर होने की संभावना छिपी हुई है। ग्राम पंचायत के पास कुछ सरप्लस लैंड होगी। गांव में बाजार लगते होंगे, उसे ग्रामीण हॉट के रूप में विकसित करें। गांव का ड्रेनेज-सीवर किसी नाला व नदी में न गिरे, बल्कि गांव से दूर देसी पद्धति से ट्रीटमेंट का प्रयोग करें तो नदी व तालाब का पानी भी शुद्ध रहेगा। तालाबों का मत्स्य पालन व अन्य कार्यों के लिए उपयोग कर सकें तो इससे ग्राम पंचायत की अतिरिक्त आय भी होगी। सीएम ने कहा कि पंचायतीराज विभाग प्रस्ताव तैयार करे, जिन ग्राम पंचायतों के पास केंद्रीय व राज्य वित्त से पैसा जाता है और इसमें से ज्यादातर वेतन-भत्तों में ही खर्च होता है। यह ग्राम पंचायत पहले चरण में जितना पैसा अपने रिसोर्सेज से एकत्र करेंगे, उतने ही पैसे राज्य सरकार विकास के लिए उपलब्ध कराएगी।

उन्होने कहा कि प्रदेश में 17 सिटी स्मार्ट बन रहे हैं। क्या ग्राम पंचायतें भी स्मार्ट हो सकती हैं। इसके लिए अनेक कार्य हो सकते हैं। ग्राम पंचायत में जनसहभागिता से साफ-सफाई, कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था हो। पॉवर कॉरपोरेशन से बात करके महत्वपूर्ण स्थानों पर स्ट्रीट लाइट व सीसीटीवी कैमरा लगा सकें। इससे सुरक्षा भी होगी तो रात में लाइट भी जलेगी। सेंसर या ग्राम पंचायत के किसी कर्मचारी की ड्यूटी लगाएं कि समय पर ऑन-ऑफ हो। गांवों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा दें। केंद्र सरकार के स्तर पर जब कोई प्रतियोगिता होगी तो यूपी की ग्राम पंचायतें अग्रणी भूमिका के साथ दिखनी चाहिए। इसमें हमारी ग्राम पंचायतों को भी पुरस्कार प्राप्त होना चाहिए।
योगी ने कहा कि पहले जितना भी कूड़ा होता था, उसके निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत के पास खाद का गड्ढा होता था। इसे फिर से ढूंढने व बनाने की आवश्यकता है। रिजर्व भूमि में खाद गड्ढा, गोचर की भूमि व निरााश्रित गोवंश के पालन के लिए गोआश्रय स्थल तैयार कराएं। जिनके पास शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है, उनकी सूची तैयार कर हर विपन्न को लाभ दिलाएं। इससे लोगों का विश्वास आपके और सिस्टम के साथ जुड़ेगा। गरीब की दुआ-आशीर्वाद लगता है तो शोषण करने पर बद्दुआ भी लगती है। जीवन लोगों की दुआ-आशीर्वाद व यशस्वी बनने के लिए है, बदनामी लेने के लिए नहीं है। बदनामी भरा जीवन नारकीय होता है।

उन्होने कहा कि ग्राम सचिवालय के पास अतिरिक्त आय के भी माध्यम बन सकते हैं। वहां कम्युनिटी सेंटर बन सकता है, गांव के सार्वजनिक कार्यक्रम हो सकते हैं। यूजर चार्ज के आधार पर ग्रामीणों को सुविधा दीजिए। इससे गांव के पास भवन भी होगा। फेयर प्राइस शॉप ग्राम सचिवालय के पास मॉडल के रूप में बन रही है। हमने छूट दी है कि केवल सरकारी राशन ही नहीं, बल्कि अन्य सामान भी वितरित कीजिए। इसका किराया ग्राम पंचायत में जमा होगा। यह भी ग्राम पंचायत के अतिरिक्त इनकम का माध्यम बन सकता है, लेकिन कुछ करने के लिए पहल व प्रयास चाहिए। अपने लिए कर सकते हैं, लेकिन अन्य कार्यों के लिए मान लेते हैं कि यह सरकारी है। सरकार के पास पैसा नहीं आएगा तो 12-14 लाख कर्मचारियों का वेतन पेंशन, भत्ता व विकास कार्य कैसे होंगे। सरकार का पैसा सरकार, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत के खाते में जाना चाहिए। इस पैसे का बेहतर उपयोग विकास के लिए हो तो इससे ग्राम पंचायत चमकता और आत्मनिर्भर, विकसित, आदर्श होगा। यह बेहतर प्रयास आपको नई पहचान दिलाएगा।

योगी ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह 21 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दे रहा है। सामूहिक विवाह कार्यक्रम, पेंशन या अन्य वेलफेयर स्कीम अनुसूचित जाति-जनजाति के नौजवानों को नई दिशा देती है। यह कार्यक्रम मजबूती से बढ़ते दिखने चाहिए। सीएम ने कहा कि आज लखीमपुर खीरी के जनजाति समुदाय (थारू) के नौजवान ने भी नियुक्ति पत्र प्राप्त किया है। बड़ी संख्या में बेटियों की उपस्थिति महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम को दिखाता है।

कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त मोनिका एस. गर्ग, अपर मुख्य सचिव (पंचायती राज) नरेंद्र भूषण, प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) डॉ. हरिओम, प्रमुख सचिव (नियुक्ति व कार्मिक) एम. देवराज, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के प्रभारी अध्यक्ष ओएन सिंह आदि मौजूद रहे।
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