*पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने सदन में किसानों के लिए उठाए आवाज,दुखहरण सिंह ठाकुर*

पंडरिया शक्कर कारखाना में गन्ना किसानों को तत्काल बकाया भुगतान देने एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भावना बोहरा ने विधानसभा में किया ध्यानाकर्षण

भावना बोहरा ने विधानसभा में कहा प्रदेश में नशीले पदार्थों और दवाइयों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक

भावना बोहरा ने राजनांदगांव सहकारी बैंक में दैनिक वेतन भोगियों की नियुक्ति में अनियमितता की जांच कर संलिप्त अधिकारियों पर की कार्यवाही की मांग

रायपुर,सियासत दर्पण न्यूज़, छत्तीसगढ़ विधानसभा में पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने गन्ना किसानों के हित में सदन का अध्यानाकर्षण किया। इस दौरान उन्होंने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, कारखाने में कार्यरत कर्मचारियों के दो माह के बकाया वेतन को तत्काल देने एवं कारखाने की उत्पादक क्षमता को बढ़ाने के संबंध में भी सदन में अपनी बात रखी। इसके साथ ही उन्होंने अवैध नशीली दवाइयों एवं नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर भी अंकुश लगाने के विषय में सदन में चर्चा की।

भावना बोहरा ने कहा कि पंडरिया स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित का कुछ दिनों पूर्व मैनें निरीक्षण किया था। इस दौरान किसानों की कुछ समस्याएं एवं कारखाने से संबंधित प्रमुख मांगे हैं जो मैं सदन के समक्ष रखना चाहती हूं, जिससे कारखाने की उत्पादक क्षमता को बढ़ाया जा सके और किसानों से अधिक गन्ने की खरीदी से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उक्त कारखाने की क्षमता 2500 मीट्रिक टन क्रशिंग प्रतिदिन है जिससे पर्याप्त उत्पादन नही हो पा रहा है और किसानों को भी समस्या हो रही है इसके निराकरण के लिए पंडरिया कारखाने में जमीन की पर्याप्त उपलब्धता है इसका सदुपयोग करते हुए कारखाने की रोजाना उत्पादन क्षमता को 5 हजार मीट्रिक टन क्रशिंग प्रतिदिन बढ़ाया जाए ताकि क्षेत्र के हजारों गन्ना उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उत्पादन बढ़ाने से प्रतिदिन लगभग 15000 किसानों की अतिरिक्त गन्ना (लगभग 20000 एकड़ फसल) खरीदी की जा सकेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी साथ ही कारखाने को भी आर्थिक लाभ होगा।

भावना बोहरा ने आगे कहा कि निरिक्षण के दौरान किसानों से मुलकात हुई जिसमें कारखाने में सबसे बड़ी समस्या किसानों के भुगतान को लेकर आ रही है। आज तक की स्थिति में किसानों से कुल 2 लाख 44 हजार मीट्रिक टन गन्ने की खरीदी की गई है, जिसके एवज में किसानों को केवल नवम्बर 2023 तक का ही भुगतान किया गया है वह भी उन्हें दो किश्तों में प्रदान किया गया और फ़रवरी माह तक किसानों का लगभग 59 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान अभी तक लंबित हैं जिसका भुगतान जल्द कराया जाए ताकि किसानों को उनकी फसल की उचित राशि मिल सके और वे गन्ना का उत्पादन सुचारू रूप से कर सकें। इसके साथ ही कारखाने में कार्यरत कर्मचारियों को भी दो माह का वेतन का भुगतान नहीं किया गया है जो लगभग 4 करोड़ रुपए होता है, देखा जाए तो कारखाने द्वारा वर्तमान स्थिति में किसानों और कर्मचारियों का मिलाकर 63 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान बाकी है, जिसे जल्द किया जाए। उन्होंने कारखाने में स्टॉक अलाटमेंट एवं न्याय योजना के तहत बकाया राशि का विषय भी सदन के समक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान में शक्कर कारखाने में राज्य सरकार द्वारा अलॉटमेंट नही आने से लगभग 45 करोड़ रुपये के शक्कर का स्टॉक कारखाने में रुका हुआ है इसके साथ ही पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 का न्याय योजना में समायोजन राशि 28 करोड़ रुपये भी बाकी है। उन्होंने 45 करोड़ के स्टॉक का अलॉटमेंट जल्द करने और न्याय योजना के बकाया राशि का भी भुगतान को जल्द से जल्द करने की बात कही ताकि कारखाने की व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित हो सके और किसान बिना किसी अवरोध के अपनी फसलों को कारखाने में बेच सकें।

उन्होंने कारखाने की वर्किंग कैपिटल को बढ़ाने और किसानों की रिकवरी राशि के भुगतान हेतु पूर्व सरकार द्वारा कोई नीति एवं रुपरेखा नहीं होने के कारण कारखाने व किसानों के बीच आ रही आपसी सामंजस्य की समस्या के निराकरण के लिए सुझाव देते हुए कह कि राज्य सरकार द्वारा यदि स्पष्ट रूपरेखा तय कर कारखाने को सहयोग नही किया जाएगा तब तक किसानों के भुगतान और वर्किंग कैपिटल की कमी की समस्या बनी रहेगी। इसलिए कारखाने द्वारा खरीदी गई कुल गन्ना मूल्य का 50 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा 1 वर्ष के लिए कारखाने को दिया जाए जिसे सरकार शक्कर बिक्री होने के बाद उसे वापस ले सकती है। पिछले सीजन में लगभग 100 करोड़ की गन्ना खरीदी हुई है लेकिन उसी समय शक्कर की बिक्री अत्यंत कम हो गई है, इसलिए सरकार द्वारा कम से कम 50 करोड़ रुपये कारखाने को वर्किंग कैपिटल के रूप में देने से कारखाने व किसानों दोनों को लाभ मिलेगा।

भावना बोहरा ने प्रदेश में नशे के अवैध व्यापार तथा नशीली दवाइयों के व्यापर पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अति संवेदनशील विषय है। आज प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार संचालित होने की वजह से अपराध भी हो रहें, जिस पर अंकुश लगाने में कहीं न कही पुलिस प्रशासन भी कमजोर दिखाई दे रही है। चरस, गांजा, ब्राउन शुगर, अवैध शराब बिक्री और नशीली दवा का अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है। नशे के अवैध कारोबार और तस्करी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने का कहीं न कहीं यह एक प्रमुख कारण है कि नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो रहें हैं। गांजा, ब्राउन शुगर, चरस एवं नशीली दवाइयों के कारोबार ने कई लोगों का जीवन खराब किया है। मेडिकल दुकानों में नशीली दवाइयों को बिना डॉक्टर की सहमति के बेचा रहा है, वहीं गांजा, ब्राउन शुगर, चरस व कोचियों द्वारा अवैध शराब की बिक्री भी हो रही है, जिसके रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाना अति आवश्यक हो चुका है। ऐसे नशीले पदार्थों का कारोबार करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य प्रदेशों से गांजा की तस्करी बढ़ रही है, ओडिशा क्षेत्र से इसका मुख्य सप्लाई चेन है जहाँ से बॉर्डर पार करके प्रदेश में इसकी सप्लाई हो रही है जिसका प्रमुख कारण कहीं न कहीं सीमाओं में सुरक्षा व जांच की कमी इसकी वजह है जिसे दुरुस्त करना भी जरुरी है ताकि यह तस्करी को रोका जा सके।

राजनांदगांव के जिला सहकारी बैंक में कांग्रेस सरकार के समय की गई दैनिक वेतन भोगियों की नियुक्ति के संबंध में भी भावना बोहरा ने सदन अपनी बात रखते हुए कहा की वित्तीय वर्ष 2020-21 से 31 दिसम्बर, 2023 तक की जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, राजनांदगांव में दैनिक वेतनभोगी दर पर अनेक कर्मचारियों की विभिन्न पदों पर अनियमित नियुक्तियां की गई हैं, जिसके लिये पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, रायपुर से अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। विभागीय प्रावधान के अनुसार पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, रायपुर की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की नियुक्ति सहकारी समितियों, सहकारी बैंकों अथवा केन्द्रीय या शीर्ष समितियों में नहीं की जा सकती हैं। पंजीयक से अनुमति प्राप्त किए बिना की गई नियुक्तियां पूर्णतः अवैधानिक हैं। उक्त अवधि में रखे गये दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक व मानदेय पर बैंक एवं समितियों की बड़ी राशि का अपव्यय हुआ है। इन नियुक्तियों से पात्र युवा वंचित हुए हैं, क्योंकि पारदर्शी तरीके से खुला विज्ञापन निकालकर योग्य एवं पात्र व्यक्ति का चयन नहीं हुआ बल्कि सांठ-गांठ तथा लेन-देन कर नियुक्तियां करने की जानकारी प्राप्त हुई है। उक्त अवधि में दैनिक वेतन पर रखे गए कर्मचारियों के पारिश्रमिक व मानदेय पर अब तक किये गये व्यय की वसूली तथा दोषी पदाधिकारी / अधिकारी से वसूली एवं इस विषय की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए भावना बोहरा ने इसमें संलिप्त लोगों पर कार्रवाई करने तथा जिन दैनिक वेतन भोगियों की नियुक्ति की गई हैं उनकी पात्रता की जांच एवं जो अपात्र हैं और नियम विरुद्ध भर्ती की गई है उस विषय में भी जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग सदन में की है।

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