रायपुर । (सियासत दर्पण न्यूज़) छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर विपक्ष ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पोषण सुरक्षा से जुड़े फोर्टीफाइड राइस (FRK) टेंडर की शर्तों में बदलाव कर 200 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है।
बैज ने कहा कि सरकार लगातार घोटालों को अंजाम दे रही है, चाहे जंबूरी घोटाला हो या 10 करोड़ का मामला। अब फोर्टीफाइड चावल खरीदी में भी भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी गई हैं।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया के चहेतों को काम दिया जा रहा है। पहले 39 रुपए प्रति किलो मिलने वाला फोर्टीफाइड चावल अब 60 रुपए प्रति किलो में खरीदने की तैयारी है, जिससे आम जनता को नुकसान और सरकारी खजाने पर करीब 200 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
एक हफ्ते में बदला टेंडर, 80% स्थानीय सप्लायर बाहर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि 2025-26 के लिए 19 दिसंबर 2025 को जारी टेंडर में महज एक हफ्ते के भीतर 26 दिसंबर को बदलाव कर नया टेंडर जारी कर दिया गया।
नए टेंडर में ऐसी तकनीकी और वित्तीय शर्तें जोड़ी गईं, जिससे राज्य के छोटे और मध्यम स्तर के एफआरके निर्माता अयोग्य हो गए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को इस तरह बदला कि करीब 80 प्रतिशत स्थानीय सप्लायर बाहर हो गए, और अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का रास्ता साफ कर दिया गया।
कमीशनखोरी का आरोप
दीपक बैज ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सरकार का फोकस पोषण सुरक्षा नहीं, बल्कि कमीशनखोरी की काली कमाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी से पहले ही सब कुछ तय कर लिया जाता है और फिर चहेती फर्मों के अनुकूल शर्तें लादी जाती हैं।
स्थानीय उद्योग संकट में, राइस मिलें बंद
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ के स्थानीय उद्योग और प्रोसेसिंग यूनिट्स गंभीर संकट में हैं। पिछले दो सालों में राज्य की सैकड़ों राइस मिलें बंद हो चुकी हैं।
रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर, रायपुर और महासमुंद जिलों की अधिकांश राइस मिलें बंद होने की कगार पर हैं। इससे फोर्टीफिकेशन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और गरीबों व बच्चों को मिलने वाला पोषणयुक्त चावल भी खतरे में पड़ गया है।
दीपक बैज ने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस कथित घोटाले को लेकर सरकार के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी स्तर पर संघर्ष करेगी।
क्या कहती है भास्कर की पड़ताल
फोर्टीफाइड राइस (एफआरके) की खरीदी दर में बढ़ोतरी से सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने का आकलन सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यदि खरीदी दर बदली जाती है तो कुल लागत में सैकड़ों करोड़ रुपए का फर्क पड़ेगा। कुल अनुमानित खरीदी 84,000 मीट्रिक टन (8.40 करोड़ किलो) फोर्टीफाइड राइस की है।
अगर एफआरके की खरीदी 39 रुपए प्रति किलो की दर से की जाती है, तो कुल खर्च करीब 327.6 करोड़ रुपए बैठता है।
वहीं दर बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करने पर यही खर्च बढ़कर लगभग 504 करोड़ रुपए हो जाएगा।
यदि खरीदी दर 65 रुपए प्रति किलो तय की जाती है, तो कुल खर्च करीब 546 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।
इस हिसाब से 39 रुपए और 60 रुपए प्रति किलो की दर के बीच लगभग 176 करोड़ रुपए का सीधा अंतर सामने आता है, जबकि 65 रुपए प्रति किलो की दर पर यह अंतर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो जाता है।






