जगदलपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) बस्तर में सोमवार की सुबह सूरज उगने के साथ गणतंत्र का नया सूर्योदय हुआ। कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों से लेकर अबूझमाड़ के जंगलों तक, जहां दशकों तक डर और लाल झंडों की छाया रही, वहां के 40 गांवों में आज तिरंगा फहराया गया। कर्रेगुट्टा तेलंगाना सीमा पर स्थित वह पहाड़ी है, जो माओवादियों का बेस कैंप हुआ करती थी। इसी साल लगभग एक माह चले लंबे अभियान के बाद सुरक्षा बलों ने इस पहाड़ी को माओवादियों से मुक्त करा, वहां सुरक्षा कैंप खोला है। यह गणतंत्र दिवस बस्तर के इतिहास में इसलिए अलग है, क्योंकि माओवादी हिंसा के विरुद्ध डबल इंजन सरकार में हुए आक्रामक प्रहार के बाद अब बस्तर का 95 प्रतिशत हिस्सा माओवादी हिंसकों से मुक्त हो चुका है और अब चार दशक बाद 40 गांवों में खुलकर संविधान को सलामी दी गई। आज उन गांवों में भी राष्ट्रगान गूंजा, जहां 26 जनवरी को सन्नाटे का दिन होता था। दरवाजे बंद रहते थे, बच्चे बाहर नहीं निकलते थे और तिरंगे का नाम लेना भी खतरे से खाली नहीं था।






