रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) बोरियाकला स्थित आरम सिटी नेक्स्ट प्रोजेक्ट अब बड़े कानूनी विवाद के घेरे में आ गया है। रेरा ने इस प्रोजेक्ट के भूखंडों की बिक्री पर रोक लगा दी है। दस्तावेजों की जांच में पता चला है कि जिस जमीन पर आवासीय प्लाट बेचे जा रहे थे, वह राजस्व रिकार्ड में अब भी कृषि प्रयोजन की भूमि के रूप में दर्ज है।
इस मामले में अनंत रियल्टी के आरोपित प्रमोटर निशांत पगारिया और सचिन बाफना की भूमिका जांच के दायरे में है। राजस्व अभिलेखों (बी-1, पी-2) में संबंधित खसरों की जमीन का उपयोग कृषि दर्ज बताया जा रहा है। यानी जमीन का आधिकारिक उपयोग अब भी खेती के लिए है।
आवासीय प्लाटिंग प्रोजेक्ट के रूप में बेचा जा रहा था
बावजूद इसके इसे टीएनसीपी (नगर तथा ग्राम निवेश) की स्वीकृति बताकर आवासीय प्लाटिंग प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित और बेचा जा रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक वैध डायवर्सन आदेश प्रभावी न हो, कृषि भूमि को आवासीय बताकर बेचना नियमों के खिलाफ है।
पहले कई खसरों को जोड़कर नया खसरा नंबर बनाया गया, फिर वही आदेश निरस्त हो गया। बाद में उसी आधार पर डायवर्सन और लेआउट स्वीकृति ली गई, जिन्हें भी उच्च अधिकारियों ने रद कर दिया। मामला न्यायालय तक पहुंचा और वहां से स्थगन आदेश भी जारी है।
रेरा ने लगाया तत्काल ब्रेक
इन सबके बीच प्रोजेक्ट की बिक्री प्रक्रिया जारी रहने की शिकायतें रेरा तक पहुंचीं। दस्तावेजों में विरोधाभास और जमीन की स्थिति स्पष्ट न होने पर रेरा ने प्रोजेक्ट का पंजीयन स्थगित कर दिया है। आदेश के मुताबिक अब कोई नए प्लाट की बिक्री नहीं होगी। रजिस्ट्री नहीं की जा सकेगी।
प्रमोटर किसी भी प्रकार का लेनदेन नहीं कर सकेंगे। खरीदारों के लिए खतरे की घंटी जानकारों का कहना है कि कृषि दर्ज जमीन को आवासीय बताकर बेचे जाने की स्थिति में भविष्य में खरीदारों को स्वामित्व, निर्माण अनुमति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल रेरा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि राजस्व और नगर निवेश से जुड़े निर्णयों की भी गहन जांच हो सकती है। 42 खसरों को जोड़कर बनाया गया था नया नंबर अनंत रियल्टी ने ग्राम बोरियाकला स्थित 42 अलग-अलग खसरा नंबरों की कुल 9.005 हेक्टेयर भूमि का रेरा पंजीयन कराया था।
तहसीलदार रायपुर ने पांच मई 2022 को संविलियन आदेश पारित कर इन सभी खसरों को मिलाकर नया खसरा नंबर 15008 बना दिया। अपर कलेक्टर ने संविलियन आदेश किया निरस्त कुछ ही महीनों बाद पांच सितंबर 2022 को अपर कलेक्टर रायपुर ने तहसीलदार का यह संविलियन आदेश निरस्त कर दिया और जमीन को उसके मूल खसरा नंबरों में बहाल कर दिया। इसके बाद भी परियोजना से जुड़ी आगे की स्वीकृतियां इसी निरस्त खसरे के आधार पर ली गईं।







