रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) अंतिम संस्कार के बाद भी पति अपनी पत्नी को विदाई नहीं दे सका। महासमुंद जिले के खल्लारी रोपवे हादसे में जान गंवाने वाली शिक्षिका आयुषी धावरे की चिता मंगलवार को जल गई। लेकिन उनके घायल पति ऋषभ धावरे अस्पताल के बिस्तर पर दर्द और बेबसी के साथ बिलखते रहे। कमर में गंभीर चोट के कारण वे न तो अंतिम यात्रा में शामिल हो सके और न ही रीति-रिवाज निभा पाए।
डॉक्टरों का कहना है कि अभी पंद्रह दिन उन्हें अस्पताल में ही रहना होगा। तब तक सभी क्रियाकर्म पूरे हो चुके होंगे। चार महीने पहले ही सात फेरे लेने वाला यह जोड़ा अब एक हादसे में हमेशा के लिए बिछड़ गया।
आयुषी और ऋषभ की शादी 23 नवंबर को हुई थी। परिवार में अभी नई शुरुआत की खुशियां थीं। लेकिन 22 मार्च को खल्लारी मंदिर में हुए रोपवे हादसे ने सब कुछ बदल दिया। जिन रिश्तेदारों ने शादी में शिरकत की थी, वही लोग अब अंतिम यात्रा में शामिल होकर गमगीन नजर आए। जिस घर में अभी शादी की यादें ताजा थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां बची हैं।
हादसे में ऋषभ के साथ उनके भाई शुभ और बहन शुभी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तीनों का रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इलाज का पूरा खर्च परिवार खुद उठा रहा है। स्वजन का आरोप है कि हादसे के बाद न प्रशासन का कोई अधिकारी मिला और न ही रोपवे संचालक कंपनी ने मदद की। इस लापरवाही ने पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।







