कोरबा: (सियासत दर्पण न्यूज़) हसदेव ताप विद्युत संयंत्र कोरबा पश्चिम (HTPP) के झाबू राखड़ बांध फूटने की घटना का असर अब राज्य के बिजली उत्पादन पर साफ नजर आने लगा है। मरम्मत कार्य शुरू होने के कारण संयंत्र से निकलने वाली राख की आपूर्ति फिलहाल बंद कर दी गई है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
इकाइयां बंद, उत्पादन क्षमता घटी
संयंत्र की 210-210 मेगावाट क्षमता वाली चार इकाइयों में से तीन और चार नंबर इकाई को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहीं एक नंबर इकाई से 110 मेगावाट और दो नंबर इकाई से 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य इकाइयों को भी पूर्ण क्षमता पर नहीं चलाया जा रहा है, जिससे कुल उत्पादन में कमी आई है।
मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी
राखड़ बांध में रिसाव की समस्या को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया जा रहा है। तटबंध को मजबूत करने, रिसाव रोकने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए राखड़ को रोकने हेतु जाली लगाने की तैयारी भी की जा रही है।
राखड़ निकासी का बदला स्थान
प्रबंधन ने 840 मेगावाट संयंत्र से निकलने वाली राख को झाबू की जगह डिंडोलभाठा राखड़ बांध की ओर मोड़ दिया है। इससे अस्थायी रूप से समस्या को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
बिजली मांग में रिकॉर्ड वृद्धि
प्रदेश में इस समय गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़कर 6900 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 200 मेगावाट अधिक है। वहीं उत्पादन घटकर 2900 मेगावाट के बजाय 2053 मेगावाट रह गया है।
अनुबंधित बिजली से संतुलन
उत्पादन और मांग के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से लगभग 4819 मेगावाट बिजली ली जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त अनुबंधित बिजली उपलब्ध होने से फिलहाल बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं बनेगी। शुक्रवार और शनिवार को भी उत्पादन इसी स्तर पर रहने की संभावना है।
विशेषज्ञ टीम करेगी जांच
झाबू राखड़ बांध फूटने की घटना की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम शुक्रवार को एचटीपीपी पहुंचेगी। टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर कारणों का पता लगाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों को प्रशिक्षण भी देगी।
दो दिन के अंदर मरम्मत कर शुरू करेंगे
झाबू राखड़ बांध पर दबाव न बने, इसलिए बिजली उत्पादन घटा कर राख उत्सर्जन बंद कर दिया गया है। शेष दो इकाइयां आधी क्षमता में चलाई जा रही हैं, उसके राख को अन्य बांध में भेजा जा रहा। मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा। आने वाले दो दिन अंदर स्थिति सामान्य कर ली जाएगी।
-एचके सिंह, मुख्य अभियंता एचटीपीपी







