बंगाल में बीजेपी की आंधी, 170 से अधिक सीटों पर आगे, 15 साल बाद TMC के हार के संकेत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है.
सियासत दर्पण न्यूज़,पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 Live के नतीजे जारी किए जा रहे हैं. सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू हो गई है. फाल्टा को छोड़कर सभी 293 सीटों पर चुनावी परिणाम के लिए वोटों की गिनती की जारी है. लगभग दोपहर 2 बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी. फिल्हाल राज्य में 293 सीटों पर पहला रुझान आ गया है.आज सबसे बड़ा सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस यानी TMC अपनी साख बचा पाएगी, सत्ता में वापसी कर पाएगी. या इस बार राज्य में कमल खिलने कामयाब हो पाएगा. फिलहाल दोनों पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी या इस बार शुभेंदु अधिकारी? कौन का होगा राज्य का अगला चेहराइस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव ( कई मायनों में अलग रहा है. चुनाव के दौरान हुई वोटिंग ने ऐतिहासिक आंकड़ा कायम किया है. पहली बार राज्य में दो चरणों में चुनाव हुए हैं. इस दौरान छिटपुट हिंसा और झड़प की खबरें भी आई हैं. साथ ही स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर विवाद भी बना रहा. पहली बार है, जब चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की मौत की खबर नहीं आई. बंगाल में इस बार सीआरपीएफ तैनात की गई थी. देश के इतिहास में पहली बार इतनी वोटिंग हुई है. इस बार का वोटिंग परसेंट 92 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया है. जिन जगह पर रिपोलिंग हुई, उसका ग्राफ भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि वोटों में इतनी बढ़ोतरी के पीछे मजदूर हैं, जो अपने राज्य लौटे हैं. इस चुनाव में यह एक एक्स फैक्टर साबित हुआ है. बीजेपी और टीएमसी में कड़ी टक्कर बीजेपी ने इस चुनाव टीएमसी के खिलाफ खूब भुनाया है. यहां 15 साल से काबिज टीएमसी के खिलाफ पनपी एंटी इनकंबेसी को बीजेपी ने हवा दी है. इसके अलावा आरजीकर रेप केस और कस्बा लॉ कॉलेज जैसी घटनाओं ने महिला सुरक्षा के मुद्दे ने टीएमसी पर काफी प्रेशर डाला है. एक्सपर्ट्स मानकर चल रहे हैं, कि इस बार शहरी और पढ़े लिखे मिडिल क्लास का गुस्सा टीएमसी को लेकर रहा है. उनका वोट बीजेपी के पक्ष में जा सकता है. टीएमसी की बात करें तो 15 साल से सत्ता पर काबिज तृणमूल एक शक्तिशाली पार्टी के तौर पर मजबूत नजर आती है. उनकी मजबूत नींव ही इस चुनाव में उनके लिए फायदेमंद है. ग्रामीण इलाकों में लक्ष्मी भंडार की लोकप्रियता ने भी तृणमूल के पक्ष में माहौल मजबूत किया है. इसके अलावा एसआईआर के चलते भी मुस्लिम समुदाय का वोट तृणमूल को गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि तृणमूल ने इस चुनाव में अपनी खोई जमीन हासिल की है. लोगों में विश्वास तो मजबूत हुआ है. हालांकि, सबसे इतर दो एग्जिट पोल को छोड़ दें, तो सभी ने इस बार बीजेपी की सरकार बनने का दावा किया है.







