बिलासपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुप तिग्गा की अदालत ने 104 वर्ष के एक बुजुर्ग व्यक्ति की 20 एकड़ जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से लाखों रुपए का चूना लगाने वाले गिरोह को कड़ा सबक सिखाया है। अदालत ने एक्सिस बैंक के तत्कालीन लोन अधिकारी सुमन कार्तिक रथ सहित चार आरोपितों को धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक साजिश का दोषी पाते हुए 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार, मुंगेली जिले के ग्राम गोइंद्रा निवासी पीड़ित बुजुर्ग मोहन बंजारे के पास करीब 20 एकड़ कृषि भूमि है। 13 मार्च 2018 के पहले आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत बुजुर्ग की सहमति और बिना जानकारी के उनकी जमीन की ऋण पुस्तिका का उपयोग किया। इसके बाद सरकंडा स्थित एक्सिस बैंक सीपत रोड शाखा से जमीन को बंधक रखकर फर्जी तरीके से 9 50,000 रुपये का केसीसी लोन पास करा लिया और रकम आपस में बांट ली।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित बुजुर्ग के पोते शिवचरण बंजारे ने अपने मोबाइल पर दादा के नाम की जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड सर्च किया। वहां रिकार्ड में जमीन एक्सिस बैंक सरकंडा में दिखाई दे रही थी। जब पूरा परिवार बैंक पहुंचा और लोन के दस्तावेज निकलवाए, तो उनके होश उड़ गए। लोन फाइल में पीड़ित मोहन बंजारे के नाम पर किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति की फोटो लगी थी। इसके बाद सरकंडा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
नकली आधार कार्ड से खुला फर्जीवाड़ा
कोर्ट ने जब पुलिस द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया, तो पाया कि जालसाजों ने फर्जीवाड़ा करने में सारी हदें पार कर दी थीं।
फोटो का अंतर: बैंक लोन आवेदन पर आरोपित परदेशी लोधी (जिसकी विचारण के दौरान मृत्यु हो चुकी है) की फोटो चिपकाई गई थी, जो असली मालिक मोहन बंजारे से पूरी तरह अलग थी।
फर्जी पहचान पत्र: लोन के लिए जो आधार कार्ड लगाया गया था, उसका और असली मालिक का आधार नंबर अलग-अलग था।
उम्र का बड़ा झोल: असली आधार कार्ड के अनुसार पीड़ित बुजुर्ग का जन्म साल 1934 (उम्र लगभग 104 वर्ष) था, जबकि फर्जी आधार कार्ड में जन्म का साल 1969 और वोटर आईडी में 1971 दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इसे नग्न आंखों से देखने पर भी साफ पता चलता है कि दस्तावेजों की कूटरचना की गई थी।
बैंक अधिकारी की मिलीभगत से पास हुआ लोन
कोर्ट ने अपने फैसले में एक्सिस बैंक के तत्कालीन रिलेशनशिप मैनेजर सुमन कार्तिक रथ उर्फ केविन को इस पूरे वित्तीय घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना। पुलिस की जब्ती और जांच रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि मैनेजर ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या मूल दस्तावेजों की जांच किए आंखें मूंदकर लोन की फील्ड रिपोर्ट तैयार की और लोन बांटने की मंजूरी दे दी। इसके अलावा मुख्य आरोपी भूपेंद्र साहू ने परदेशी लोधी से ””मोहन”” के नाम पर बैंक के दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर करवाए थे, जबकि बंटी उर्फ शैलेंद्र और टिकेंद्र जायसवाल ने बैंक से लोन की रकम का आहरण किया था।
फैक्ट फाइल: किसे कितनी मिली सजा अदालत ने चारों दोषियों—
(1) सुमन कार्तिक रथ, (2) भूपेंद्र कुमार साहू, (3) बंटी उर्फ शैलेंद्र सिंह बघेल, और (4) टिकेंद्र जायसवाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत 3-3 वर्ष सश्रम कारावास व 5-5 हजार हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
जेल जाने से बचने व नरमी बरतने की मांग खारिज
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपने पहले अपराध का हवाला देकर परिवीक्षा अधिनियम के तहत जेल जाने से बचने और नरमी बरतने की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह एक गंभीर वित्तीय अपराध है, जहां एक अति-वृद्ध व्यक्ति पर झूठा कर्ज मढ़ दिया गया, इसलिए इसमें कोई उदारता नहीं दिखाई जा सकती।
पीड़ित बुजुर्ग को मिलेगा 10,000 रुपये मुआवजा
कोर्ट ने आदेश दिया कि चारों दोषियों द्वारा अर्थदंड जमा करने के बाद, उसमें से 2,500- 2,500 (कुल 10,000) पीड़ित बुजुर्ग को क्षतिपूर्ति (मुआवजे) के रूप में दिए जाएंगे।






