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*इंदौर से IPL के शिखर तक: रजत पाटीदार की संघर्ष और सफलता की कहानी*

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नई दिल्ली ।(सियासत दर्पण न्यूज़)  कहते हैं कि वक्त का पहिया जब घूमता है, तो अर्श से फर्श और फर्श से अर्श तक का सफर पलक झपकते ही तय हो जाता है। किस्मत कब, किस मोड़ पर आपके सब्र का इम्तिहान लेकर आपको कामयाबी के उस शिखर पर बैठा देगी जहां दुनिया सिर्फ आपको सजदा करेगी, यह कोई नहीं जानता। क्रिकेट की चकाचौंध से भरी दुनिया यानी आईपीएल (IPL) के इतिहास में जब भी धैर्य, समर्पण और तकदीर के अद्भुत मिलन की बात होगी, तो इंदौर के शांत स्वभाव के लड़के रजत पाटीदार का नाम सुनहरे अक्षरों में लिया जाएगा।

कल तक जिस खिलाड़ी के हाथ खाली थे, जिसे अपनी काबिलियत साबित करने के लिए एक अदद मौके की तलाश थी, आज वह भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े दिग्गजों रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिष्ठित फेहरिस्त में शामिल हो चुका है। रजत पाटीदार अब सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) को लगातार दो बार खिताबी बादशाहत दिलाने वाले एक करिश्माई कप्तान बन चुके हैं।

जब बंद हो गए थे सब रास्ते, तब तकदीर ने खेली अपनी चाल

इस अविश्वसनीय कहानी की शुरुआत होती है साल 2022 की मेगा नीलामी से। साल 2021 के सीजन में आरसीबी के लिए खेलते हुए पाटीदार के बल्ले से महज 71 रन निकले थे। नतीजा यह हुआ कि 2022 की नीलामी में सभी फ्रेंचाइजियों ने उनसे मुंह मोड़ लिया; वे अनसोल्ड रहे। क्रिकेट पंडित मानने लगे थे कि शायद इस खिलाड़ी का सफर यहीं थम गया। लेकिन नियति ने परदे के पीछे कुछ और ही पटकथा लिख रखी थी।

आरसीबी के खेमे से लवनीथ सिसोदिया चोटिल होकर बाहर हुए और रिप्लेसमेंट के तौर पर किस्मत ने रजत पाटीदार का दरवाजा खटखटाया। दिलचस्प और भावुक कर देने वाला मोड़ यह था कि जब आरसीबी मैनेजमेंट का फोन आया, तब रजत के घर में शहनाइयां गूंजने वाली थीं और वे शादी के बंधन में बंधने जा रहे थे।

लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून इस कदर हावी था कि उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े व्यक्तिगत फैसले (शादी) को टाल दिया और आरसीबी की जर्सी पहनकर मैदान पर उतर गए। उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लपका और लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबले में एक ऐतिहासिक शतक जड़कर यह साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं।
2025 का वो हैरान करने वाला फैसला

पाटीदार के निरंतर शानदार प्रदर्शन को देखते हुए आरसीबी प्रबंधन ने साल 2025 में एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया। टीम की कमान रजत पाटीदार को सौंप दी गई। कई विश्लेषक इस फैसले पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन पाटीदार ने अपनी रणनीतिक कुशलता से आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। उन्होंने उस साख और सूखे को खत्म किया जो पिछले 17 सालों से आरसीबी के माथे पर एक कलंक की तरह लगा हुआ था; उन्होंने टीम को पहली आईपीएल ट्रॉफी जिताई।
धोनी जैसी शांति और लगातार दूसरा खिताब

जब 2025 में आरसीबी चैंपियन बनी, तो कुछ आलोचकों ने इसे महज एक ‘तुक्का’ या किस्मत का खेल करार दिया। पाटीदार ने इस तंज का जवाब जुबान से नहीं, बल्कि अपने बल्ले और फैसलों से देना मुनासिब समझा। आईपीएल-2026 के इस सीजन में पाटीदार का एक बिल्कुल नया रूप देखने को मिला। वे क्रीज पर जितने आक्रामक और खूंखार नजर आए, मैदान पर कप्तानी करते समय उतने ही कूल और शांत दिखे, ठीक महेंद्र सिंह धोनी की तरह।

फंसे हुए मैचों में उनके द्वारा लिए गए कूटनीतिक फैसलों ने हारी हुई बाजियों को पलटा। आखिरकार 31 मई को गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए खिताबी महामुकाबले में आरसीबी ने जीत का परचम लहराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत ने उन सभी आवाजों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया जो उनकी पहली जीत को इत्तेफाक बता रहे थे।

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