*रायपुर,,राज्यपाल रमन डेका से अपनी शक्तियों का प्रयोग करने पूर्व मंत्री,मोहम्मद अकबर ने किया आग्रह*

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सियासत दर्पण न्यूज़ रायपुर की खबर

वृद्धजनों, विधवाओं व द्विव्यांगो को पेंशन की राशि दिलाने अकबर ने राज्यपाल को लिखा पत्र

रायपुर,सियासत दर्पण न्यूज़,, छत्तीसगढ़ में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन तथा सभी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि पेंशनधारियों को पिछले कई माह से नहीं मिल पा रही है। इसे लेकर प्रदेश के पूर्व केबिनेट मंत्री व कांग्रेस वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल को पत्र लिखा है। अकबर ने राज्यपाल से पेंशनधारियों को बकाया पेंशन राशि तत्काल दिलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित करें कि भारत सरकार से इस मद की राशि आती रहेगी, तब तक किसी अन्य मद से नियामानुसार पेंशन धारियों को पेंशन का भुगतान किया जाए जिसका बाद में समायोजन किया जाएगा क्योंकि पहले भी ऐसे हुआ है।
राज्यपाल रमन डेका को लिखे पत्र में अकबर ने कहा है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन,दिव्यांग पेंशन के साथ साथ सभी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि केन्द्र एवं राज्य सरकार के राज्यांशों से प्रदत्त की जाती है। प्रदेश के लगभग 22,70,000 पेंशनधारियों को पिछले लगभग पांच माह से पेंशन राशि नहीं मिलने से वे दर-दर भटक रहे है। कमरतोड़ महंगाई के चलते इन गरीबों का गुजारा बड़ी मुश्किल से हो रहा है। अब तो फूटी कौड़ी भी अपने पास न होने से इन लोोगों के समक्ष भूखे मरने की नौबत है। भीषण गर्मी में ये लोग अपनी गुहार लेकर शासकीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे है। सुशासन तिहार के शिविर में मिल रहे आवेदनों व शिकायतों में सर्वाधिक संख्या पेंशन की राशि के लिए भटक रहे इन हितग्राहियों की है। इन सभी को सुशासन तिहार में शामिल करने की आवश्यकता है। यदि सुशासन तिहार समय अवधि में इनको पेंशन प्राप्त नहीं हुआ तो सुशासन की अवधि समाप्त होने पर और किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाएगा। इसलिए समय रहते इनको पेन्शन राशि का भुगतान कर दिया जाना चाहिए।

संवैधानिक अधिकार का दिया हवाला

 

उन्होंने राज्यपाल के संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि ‘संविधान के अनुच्छेद 154 में राज्य की कार्यपालिका शक्ति परिभाषित की गई है। जिसके अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगें।

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