जगदलपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में स्थित केंद्रीय कारागार (सेंट्रल जेल) इन दिनों एक बार फिर अपनी आंतरिक व्यवस्था, कैदियों की निगरानी प्रणाली और लचर स्वास्थ्य सुविधा को लेकर चौतरफा विवादों के घेरे में आ खड़ा हुआ है। महज दस दिनों के संक्षिप्त अंतराल के भीतर जेल में बंद तीन अलग-अलग बंदियों की रहस्यमयी और आकस्मिक मौतों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली की कलई खोलकर रख दी है। ताजा घटनाक्रम दुष्कर्म (रेप) के संगीन आरोप में लंबे समय से जेल में निरुद्ध एक 60 वर्षीय विचाराधीन बुजुर्ग कैदी सुंदु कश्यप की इलाज के दौरान हुई दर्दनाक मौत से जुड़ा हुआ है।
28 दिसंबर से जेल में बंद था मृतक
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्रेकोट नयापारा (मारडूम) का मूल निवासी सुंदु कश्यप बीते 28 दिसंबर 2025 से दुष्कर्म के एक मामले के तहत केंद्रीय जेल जगदलपुर में न्यायिक हिरासत में बंद था। बताया जा रहा है कि छह जून की देर रात जेल की बैरक में अचानक उसका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ गया। जेल के प्रहरियों और डॉक्टरों ने आनन-फानन में रात करीब 11:40 बजे उसे मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के आपातकालीन वार्ड में दाखिल कराया, जहां लगातार गिरते स्वास्थ्य के कारण अगले ही दिन सात जून की सुबह 7:47 बजे उसने दम तोड़ दिया। हालांकि, जेल प्रबंधन और डॉक्टरों की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस मौत की वजह पूरी तरह से चिकित्सकीय (हार्ट फेल्योर या हाई बीपी) बताई जा रही है।
एक जून को हत्या के आरोपी की हुई थी मौत
केंद्रीय जेल में मौतों का यह सिलसिला इसी महीने की 1 जून को शुरू हुआ था, जब अपने सगे चाचा की हत्या के आरोप में जेल में बंद महिला कैदी रयमती बघेल ने जेल प्रहरियों की आंखों में धूल झोंककर अपनी ही चुन्नी से फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी। इस आत्मघाती घटना के सदमे से जेल अमला उबर भी नहीं पाया था कि माओवादी (नक्सली) मामलों के विचाराधीन कैदी रमेश कुंजाम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। तब जेल प्रबंधन ने दलील दी थी कि रमेश बाथरूम में पैर फिसलने के कारण गिरा था और सिर में अंदरूनी गहरी चोट लगने से उसकी जान गई।
कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इन लगातार तीन मौतों को जेल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही और मानवाधिकारों का घोर हनन बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने और प्रत्येक मृतक के पीड़ित परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की पुरजोर मांग उठाई है।
