*बस्तर की बेटियों का चौथा खिताबी कमाल*

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जगदलपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़) बस्तर जैसे सुदूर और संवेदनशील वनांचल क्षेत्र की प्रतिभावान बेटियों ने एक बार फिर खेल के मैदान पर अपने अद्वितीय कौशल और अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य को गौरवान्वित किया है। माता रुक्मणी महिला फुटबॉल क्लब (एमआरएफसी) डिमरापाल (बस्तर) की युवा महिला टीम ने छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल लीग के वर्तमान संस्करण के खिताब पर एकतरफा कब्जा जमा लिया है। इस खिताबी जीत के साथ ही बस्तर की इन बेटियों ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) द्वारा आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की इंडियन विमेंस फुटबॉल लीग-टू (IWFL-2) के लिए क्वालीफाई कर लिया है, जहां वे अब छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी।

छह में से चार बार जीत चुकी हैं प्रतिस्पर्धा

वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल लीग की विधिवत शुरुआत होने के बाद से अब तक कुल छह सीजन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से रिकॉर्ड चौथी बार एमआरएफसी की टीम चैंपियन बनी है। इस वर्ष 10 मई से राज्य के तीन प्रमुख शहरों- भिलाई, रायपुर और आरकेएम नारायणपुर के मैदानों में खेली गई प्रतियोगिता में प्रदेश की टॉप छह महिला फुटबॉल टीमों ने हिस्सा लिया था। लीग में सभी प्रतिभागी टीमों को एक-दूसरे के खिलाफ डबल राउंड-रॉबिन के तहत दो-दो मैच खेलने थे। एमआरएफसी की टीम ने लीग स्टेज में अपने हिस्से के सभी 10 मैच खेल लिए हैं और अपने खेल का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने सभी मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की है।

पद्मश्री से सम्मनित धर्मपाल सैनी ने रखी थी क्लब की नींव

टीम ने अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर रहते हुए उप-विजेता टीम एमजीएम एम्बुश भिलाई पर निर्णायक बढ़त बनाकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। बस्तर में महिला फुटबॉल की नर्सरी के रूप में विख्यात एमआरएफसी क्लब की नींव समाजसेवी और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित धर्मपाल सैनी ने वर्ष 2004-2005 में रखी थी।

टीम के खिलाड़ियों की औसत आयु 15 वर्ष

खिलाड़ियों की औसत आयु 15 वर्ष है। ज्योति नाग और नवीना मौर्य जैसी आधा दर्जन खिलाड़ी तो 14 साल से भी कम उम्र की हैं। वहीं रीत कश्यप, लक्ष्मी मंडावी, पिंकी कश्यप, मुस्कान सलाम और रीपिका कोर्राम जैसी सीनियर खिलाड़ियों का अनुभव टीम की मुख्य ताकत बना। पूरे टूर्नामेंट के 10 मैचों में एमआरएफसी ने विरोधी टीमों के खिलाफ कुल 47 गोल दागे, जबकि उनके मजबूत डिफेंस के आगे विपक्षी टीमें पूरे टूर्नामेंट में केवल 5 गोल ही कर सकीं। टीम की स्टार स्ट्राइकर रीपिका कोर्राम ने अकेले 13 गोल दागकर टॉप स्कोरर का खिताब अपने नाम किया।

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