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*झलप पीएचसी की बदहाल व्यवस्था उजागर*

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महासमुंद।(सियासत दर्पण न्यूज़)  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम झलप के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही ने पूरे इलाके की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। पखवाड़े भर से इस सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों निर्धन ग्रामीणों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। दरअसल, इस केंद्र पर नियमित रूप से पदस्थ एकमात्र योग्य महिला चिकित्सक डॉ. सुधा रैतिया उच्च पीजी (Post Graduation) अध्ययन के लिए लंबी छुट्टी पर चली गई हैं। उनके अवकाश पर जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग ने यहाँ किसी अन्य डॉक्टर की स्थायी तैनाती नहीं की, जिससे पूरा अस्पताल अब भगवान भरोसे चल रहा है।

नर्स और ड्रेसर पता करते हैं बीमारी

अस्पताल की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां ओपीडी (OPD) में आने वाले गंभीर मरीजों के नब्ज टटोलने और उनका प्राथमिक इलाज करने का जिम्मा अब वहां तैनात केवल नर्सों और ड्रेसर के कंधों पर आ टिका है। जब भी कोई मरीज गंभीर हालत में पहुंचता है, तो नर्सें अपनी लाचारी के चलते तत्काल मोबाइल फोन मिलाकर दूर किसी अन्य ब्लाक या जिले में बैठे डॉक्टरों को मरीज के लक्षण बताती हैं और फिर फोन पर उनके द्वारा लिखवाई गई दवाओं को पर्ची पर उतारकर मरीजों को दे देती हैं। फोन पर चल रहे इस कॉल-सेंटर नुमा इलाज की पद्धति से जहां मरीजों की जान को हर वक्त भारी खतरा बना रहता है, वहीं इस अव्यवस्था से स्थानीय जनता में रोष व्याप्त है। झलप के इस मुख्य स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के करीब 35 से 40 आदिवासी और कृषि बाहुल्य गांवों के गरीब लोग पूरी तरह निर्भर हैं, जहां हर दिन औसतन 50 से 60 मरीज पहुंचते हैं।

सत्ताधारी नेता का निजी अस्पताल सवालों के घेरे में

इस पूरी लचर और त्रासद स्थिति के पीछे राजनीतिक पहलू भी सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और नागरिकों का आरोप है कि सत्ताधारी दल भाजपा के स्थानीय नेता इस मामले पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। उक्त प्रभावशाली भाजपा नेता का स्वयं का बड़ा और सर्वसुविधायुक्त निजी (प्राइवेट) अस्पताल संचालित होता है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर न होने का सीधा और परोक्ष वित्तीय लाभ उनके निजी अस्पताल को मिल रहा है, जहां गरीब ग्रामीण जमीन और जेवर गिरवी रखकर महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। इधर, महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सीएमएचओ (CMHO) को तत्काल झलप में वैकल्पिक और नियमित डॉक्टर की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।

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