Home / छत्तीसगढ़ / *सीरियल किलर का खौफनाक खेल, मौत के बाद भी रहा साथ*

*सीरियल किलर का खौफनाक खेल, मौत के बाद भी रहा साथ*

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

खर्वे का खूनी रहस्य: 98 दिनों तक मौत बांटता रहा ‘जिंदा शैतान’, गांव में पसरा था खौफ, आखिर खुला 8 हत्याओं का सनसनीखेज राज

रामसहाय जायसवाल निकला मौत का सौदागर,खर्वे हत्याकांड की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

कसडोल(छत्तीसगढ़ परिदर्शन)(सियासत दर्पण न्यूज़)  कभी शांत और सामान्य जीवन जीने वाला ग्राम खर्वे पिछले चार महीनों से एक ऐसे रहस्य की गिरफ्त में था, जिसने पूरे इलाके को भय, संदेह और अंधविश्वास के अंधेरे में धकेल दिया था। गांव में एक-एक कर लोगों की मौत हो रही थी। मौतें भी ऐसी, जिनका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आ रहा था। कोई अचानक बीमार पड़ता, अस्पताल पहुंचता और कुछ ही घंटों में दम तोड़ देता। ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। कोई इसे टोना-टोटका बता रहा था तो कोई गांव पर किसी अनिष्टकारी शक्ति की छाया मान रहा था। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि मौत का यह सिलसिला किसी अदृश्य शक्ति का नहीं, बल्कि गांव में ही रहने वाले एक ऐसे व्यक्ति का खेल था, जो मृतकों के घर जाकर संवेदना प्रकट करता था, अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करता था और अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था।
चार महीने तक मौत का यह खेल चलता रहा और आखिरकार पुलिस ने उस रहस्य से पर्दा उठा दिया, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। जांच में सामने आया कि गांव का ही निवासी रामसहाय जायसवाल एक-एक कर अपने परिचितों को जहरीली शराब पिलाकर मौत के घाट उतारता रहा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

संदेह की शुरुआत और पुलिस की एंट्री

दिनांक 06 जून 2026 को ग्राम खर्वे के ग्रामीणों ने एसडीओपी कसडोल को एक आवेदन सौंपा। आवेदन में फरवरी से मई 2026 के बीच गांव में हुई आठ संदिग्ध मौतों का उल्लेख करते हुए गांव के ही रामसहाय जायसवाल पर संदेह व्यक्त किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच प्रारंभ की। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अधिकांश मृतकों का अंतिम संस्कार हो चुका था और घटनाएं कई महीनों के अंतराल में हुई थीं।
फिर भी पुलिस ने हार नहीं मानी। सात मृतकों के शवों का उत्खनन कराया गया और उन्हें पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर स्थित मेकाहारा भेजा गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सभी शवों का परीक्षण किया तथा डीएनए, विसरा और अन्य नमूने सुरक्षित रखे गए। एक मृतक बुधराम जायसवाल का शव परिजनों द्वारा पहले ही दाह संस्कार किया जा चुका था।

पुलिस की दोहरी रणनीति

जांच के दौरान पुलिस की एक टीम लगातार गांव में रहकर लोगों से पूछताछ करती रही, जबकि दूसरी टीम तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी रही। धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि आरोपी रामसहाय ने कुछ समय पहले किसी ग्रामीण से चूहा मारने की दवा के नाम पर सुहागा (जहरीला पदार्थ) प्राप्त किया था।
यहीं से जांच की दिशा बदल गई।
जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर रामसहाय से पूछताछ शुरू की तो उसने पहले खुद को निर्दोष बताया। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस उसके सामने सबूत रखती गई, वह टूटता गया और अंततः उसने अपने अपराध स्वीकार कर लिए।

पहले कुत्ते पर किया मौत का प्रयोग
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला था। उसने बताया कि इंसानों को निशाना बनाने से पहले उसने एक कुत्ते पर सुहागा का परीक्षण किया था। कुत्ते की मौत हो जाने और किसी को शक नहीं होने पर उसका आत्मविश्वास बढ़ गया। इसके बाद उसने अपने परिचितों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

पहला शिकार – बद्री
दिनांक 06 फरवरी 2026 को आरोपी ने बद्री को अपना पहला शिकार बनाया।
आरोपी के अनुसार बद्री अक्सर उसके साथ गाली-गलौज करता था और शराब पिलाने के लिए दबाव बनाता था। इसी रंजिश के चलते रामसहाय ने शराब में सुहागा मिलाकर बद्री को पिला दिया। जहरीली शराब पीने के बाद बद्री की मौत हो गई।
जब किसी को कोई संदेह नहीं हुआ, तब आरोपी का हौसला और बढ़ गया।
दूसरा शिकार – बुठालु
20 फरवरी 2026 को आरोपी ने बुठालु को निशाना बनाया।
आरोपी ने बताया कि समाज को गाली देने और विधानसभा चुनाव के दौरान हुए विवाद के कारण उसके मन में बुठालु के प्रति गहरी नाराजगी थी। उसने उसे भी शराब में जहर मिलाकर पिलाया और उसकी मौत हो गई।
तीसरा शिकार – छत्तूराम
02 मार्च 2026 को छत्तूराम की बारी आई।
आरोपी को संदेह था कि छत्तूराम उसकी पत्नी पर गलत नजर रखता है। इसी बात को लेकर उसके मन में प्रतिशोध की भावना थी। उसने मौका देखकर छत्तूराम को भी जहरीली शराब पिला दी। कुछ ही समय बाद उसकी भी मौत हो गई।
चौथा शिकार – बुधराम
20 मार्च 2026 को बुधराम को मौत के घाट उतारा गया।
आरोपी के अनुसार बुधराम के साथ जमीन संबंधी विवाद और सामाजिक रंजिश थी। उसी विवाद का बदला लेने के लिए उसने बुधराम को शराब में सुहागा मिलाकर पिलाया। बुधराम की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे बाद में जांच और भी जटिल हो गई।
पांचवां शिकार – विनोद कुमार
31 मार्च 2026 को विनोद कुमार की मौत हुई।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि विनोद अक्सर उसके साथ गाली-गलौज करता था। इसी कारण उसने उसे भी जहरीली शराब पिलाई। हालत बिगड़ने पर विनोद को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
छठवां शिकार – गजानंद
28 अप्रैल 2026 को गजानंद की मौत हुई।
रामसहाय को संदेह था कि गजानंद उस पर बैगा-गुनिया और टोना-टोटका करता है, जिसके कारण वह कर्ज से मुक्त नहीं हो पा रहा और उसके जीवन में सुख-शांति नहीं है।
इसी अंधविश्वास और मानसिक कुंठा के चलते उसने गजानंद को भी जहर देकर मार डाला।
सातवां शिकार – चैतुराम
चैतुराम से आरोपी ने लगभग 50 हजार रुपये उधार लिए थे।
ब्याज चुकाने से बचने और कर्ज से छुटकारा पाने के लिए उसने चैतुराम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
29 अप्रैल 2026 को उसने चैतुराम को शराब में सुहागा मिलाकर पिलाया और उसकी भी मौत हो गई।
आठवां शिकार – महेतरूराम
14 मई 2026 को महेतरूराम इस खूनी सिलसिले का आठवां शिकार बना।
आरोपी ने बताया कि वर्ष 2023 के चुनाव के दौरान उसके साथ विवाद और मारपीट हुई थी। बाद में महेतरूराम बीच-बीच में ताने भी मारता था।
पुराने बदले की आग में जल रहे आरोपी ने उसे भी जहरीली शराब पिलाकर मौत के घाट उतार दिया।

लेकिन एक व्यक्ति बच गया
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने दिनांक 14 अप्रैल 2026 को कार्तिक नामक व्यक्ति को भी जहरीली शराब पिलाई थी।
शराब पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, लेकिन समय पर उपचार मिलने के कारण उसकी जान बच गई। इसी मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास का अपराध भी दर्ज किया है।

सबसे खौफनाक पहलू

पूरे मामले का सबसे डरावना पहलू यह रहा कि आरोपी हर घटना के बाद खुद को निर्दोष साबित करने के लिए मृतकों के परिवारों के बीच मौजूद रहता था। वह बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता था। मौत होने पर शोक व्यक्त करता था। अंतिम संस्कार में शामिल होता था। और इसी तरह लोगों का विश्वास जीतकर संदेह से दूर बना रहता था।

पुलिस ने सुलझाई प्रदेश की बहुचर्चित मर्डर मिस्ट्री

पुलिस ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध 08 हत्या और 01 हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।
लगातार चार महीनों तक गांव में फैली दहशत, रहस्यमयी मौतों और अंधविश्वास के वातावरण के बीच पुलिस ने धैर्य, तकनीकी जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गहन पूछताछ के माध्यम से इस जटिल मामले का खुलासा किया। उक्त प्रकरण की गंभीरता के मद्देनजर आईजी रायपुर श्री अमरेश मिश्रा भापुसे के द्वारा शुरूआत से ही लगातार दिशा निर्देश दिये जा रहे थे। साथ ही पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. शर्मा के कुशल निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी कसडोल श्री कौशल किशोर वासनिक के कुशल नेतृत्व में निरीक्षक प्रवीण मिंज, सायबर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रणाली वैद्य की प्रमुख भूमिका रही। प्रदेश के बहुचर्चित 08 व्यक्तियों की सुनियोजित हत्या एवं हत्या के प्रयास का मामला पुलिस टीम द्वारा उत्कृष्ट दक्षता, सुझबुझ एवं संयम का परिचय देते हुए, जटिल अपराध को सफल तरीके से सुलझाने में सफलता प्राप्त की गई है।

ग्राम खर्वे की यह कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है, जहां एक व्यक्ति अपने मन में पल रही रंजिश, प्रतिशोध, मानसिक कुंठा और अंधविश्वास के कारण धीरे-धीरे सीरियल किलर बन गया और अपने ही परिचितों को मौत के घाट उतारता रहा। लेकिन आखिरकार 98 दिनों तक चला यह खूनी खेल पुलिस की विवेचना के सामने टिक नहीं पाया और खर्वे की सबसे भयावह मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश हो गया।

3
IMG-20260612-WA0029
IMG-20260612-WA0030

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page