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*एक टीआई पर सौ-सौ केस, कैसे थमेगा साइबर क्राइम?*

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रायपुर।(सियासत दर्पण न्यूज़)  राज्य में आनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, बैंकिंग फ्राड और इंटरनेट मीडिया अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इनकी जांच के लिए पुलिस का ढांचा अब भी कमजोर बना हुआ है। प्रदेश के 33 जिलों में केवल 13 साइबर थाने संचालित हैं, जबकि 20 जिलों में अब तक अलग साइबर थाना नहीं है। स्थिति यह है कि केंद्र सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार साइबर अपराधों की विवेचना का अधिकार केवल थाना प्रभारी (टीआइ) को है। ऐसे में कई जिलों में एक-एक टीआइ के जिम्मे 60 से 100 तक मामलों की जांच पहुंच गई है।

रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों में साइबर अपराधों के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। एक ही अधिकारी पर बड़ी संख्या में लंबित मामलों का दबाव होने से विवेचना की गति प्रभावित हो रही है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। साइबर अपराधों की जांच सामान्य अपराधों की तुलना में अधिक तकनीकी और समय लेने वाली होती है। इसमें डिजिटल साक्ष्य जुटाने, बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल डेटा, आइपी एड्रेस और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों से समन्वय की आवश्यकता पड़ती है।

सीमित स्टाफ से जांच पर बढ़ रहा दबाव

रायपुर साइबर थाना प्रदेश में अपेक्षाकृत बेहतर संसाधनों वाला थाना है, लेकिन यहां भी शिकायतों की संख्या के मुकाबले स्टाफ सीमित है। वहीं अधिकांश जिलों में साइबर थाने महज चार से पांच कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सीमित मानवबल के कारण तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल फोरेंसिक, आरोपियों की तलाश और बैंकिंग ट्रेल की जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

हर जिले में विशेषज्ञ थाने की जरूरत

साइबर अपराधों का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होने से जांच और जटिल हो जाती है। एक ही मामले में बैंक खाता किसी अन्य राज्य में, मोबाइल नंबर दूसरे राज्य का और आरोपी तीसरे राज्य में सक्रिय मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में साइबर थाना, प्रशिक्षित जांच अधिकारी और आधुनिक डिजिटल फोरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर थानों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने और प्रशिक्षित मानवबल तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

पांच और जिले में साइबर थाना खोलने का प्रस्ताव

बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सक्ती, बलरामपुर और रायपुर पुलिस कमिश्नरी में नए साइबर थाने खोलना प्रस्तावित हैं। इसके लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजे जा चुके है। प्रत्येक साइबर थाने में 10 विशेषज्ञ पद की मांग की गई है।

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