रायपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) रिश्तों की आड़ में संगठित अपराध का मामला रायपुर पुलिस की जांच में सामने आया है। राजधानी के तीन कारोबारियों से असली सोना बताकर 22.50 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
पुलिस पूछताछ में राजफाश हुआ है कि गिरोह का मास्टरमाइंड शंभू राय पहले अकेले काम करता था। बाद में उसने अपनी चाची गीता गुजराती को ठगी के इस धंधे में शामिल कर लिया। दोनों की बढ़ती कमाई और आलीशान रहन-सहन देखकर पड़ोस में रहने वाली शांति गुजराती भी गिरोह का हिस्सा बन गई। इसके बाद चाची-भतीजे और उनकी साथी ने कई राज्यों में लोगों को शिकार बनाया।
पीतल को बताता था सोना
पुलिस के अनुसार, शंभू राय विभिन्न राज्यों में घूम-घूमकर राशि (रत्न) पत्थर बेचता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात जयपुर में स्टोन कारोबारी से हुई। कारोबारी ने उसे सोने जैसी दिखने वाली पीतल की चेन दिखाई और बताया कि इसी के सहारे लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया जा सकता है। उसने शंभू को न केवल नकली जेवर उपलब्ध कराए, बल्कि पूरी ठगी की रणनीति भी समझाई।
भरोसा जीतकर करते थे ठगी
शंभू ने पुलिस को बताया कि गिरोह पहले ऐसे लोगों की तलाश करता था, जिन्हें जल्दी मुनाफा कमाने का लालच दिया जा सके। आरोपित खुद को मजदूर या खोदाई करने वाला बताते थे और कहते थे कि खोदाई के दौरान उन्हें पुराने सोने के जेवर मिले हैं। वह लोगों को सोने जैसा दिखने वाला जेवर दिखाते थे। यदि वह जांच कराने की बात करता तो गिरोह उसे असली सोने का छोटा टुकड़ा देता। जांच में सैंपल असली निकलने के बाद पीड़ित विश्वास में आ जाता। इसके बाद लाखों रुपये लेकर उसे पीतल के जेवर थमा देते।
बिहार से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला
राजस्थान से ठगी का तरीका सीखने के बाद शंभू राय ने चाची गीता गुजराती को धंधे में शामिल किया। वर्ष 2023 में दोनों बिहार के सासाराम पहुंचे। वहां उन्होंने एक व्यक्ति को खोदाई में सोना मिलने की कहानी सुनाई और जांच के लिए असली सोने का सैंपल दिया। सैंपल सही निकलने के बाद पीड़ित ने नकली जेवर खरीद लिए और 50 हजार रुपये गंवा दिए। पहली वारदात सफल होने के बाद दोनों ने झारखंड के देवघर में एक अन्य व्यक्ति को झांसे में लेकर 1.25 लाख की ठगी की। लगातार सफलता मिलने पर इसे नियमित कारोबार बना लिया।
पड़ोसी महिला भी बनी गिरोह की सदस्य
ठगी से होने वाली कमाई के कारण आरोपितों के रहन-सहन, महंगे कपड़े, बेहतर जीवनशैली और लगातार यात्राओं को देखकर पड़ोसी शांति गुजराती उनके संपर्क में आई और गिरोह का हिस्सा बन गई। तीनों ने देशभर में ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
रायपुर में तीन कारोबारियों को बनाया शिकार
जांच में सामने आया है कि मई 2026 में गिरोह रायपुर पहुंचा। यहां उन्होंने तीन कारोबारियों से संपर्क कर खोदाई में पुराने आभूषण मिलने का भरोसा दिलाने असली सोने का सैंपल दिया। जांच में सैंपल सही निकलने पर कारोबारियों ने लाखों रुपये देकर कथित सोने के जेवर खरीद लिए। बाद में पता चला कि वे सभी जेवर पीतल के थे। इस तरह गिरोह ने तीन कारोबारियों से 22.50 लाख रुपये की ठगी कर ली।






