*लिखने की प्रवृत्ति कम होने से यह स्थिति*

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बिलासपुर। (सियासत दर्पण न्यूज़) उच्च शिक्षा जगत के लिए एक चिंताजनक खबर है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध 43 कालेजों में यूजी-पीजी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम विषम सेमेस्टर की परीक्षा चल रही है। परीक्षार्थी पूरी आंसरशीट तक नहीं भर पा रहे हैं। दरअसल कोरोना महामारी के बाद से युवाओं में लिखने की प्रवृत्ति कम हो गई है जो अब तक गति में नहीं आई है। सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कई परीक्षार्थी या तो अधूरी आंसरशीट छोड़कर निकल रहे हैं या फिर स्पेस बर्बाद कर रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में शिक्षण सत्र 2023-24 विषम सेमेस्टर यूजी-पीजी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम की परीक्षा को आरंभ हुए दो दिन बीत चुका है। परीक्षा विभाग ने पहली बार एक नया प्रयोग करते हुए महिला उड़नदस्ता गठित किया। टास्क फोर्स ग्रुप का निर्माण कर वार रूम से सीसीटीवी के माध्यम से सीधी निगरानी भी कर रहा है। हालांकि अब तक किसी भी परीक्षा केंद्र में गड़बड़ी नहीं मिली। नकल का एक भी प्रकरण भी दर्ज नहीं हुआ है। बुधवार को उड़नदस्ता बैरंग लौटी। परीक्षा विभाग ने इस बार 43 कालेजों को परीक्षा केंद्र बनाया है। लगभग कर रहे हैं इसके अलावा केंद्रों में सतत निरीक्षण भी जारी है। इस बीच परीक्षा हाल में पर्चा लिख रहे परीक्षार्थियों को लेकर जानकारी मिल रही है कि अधिकांश युवा परीक्षा हाल में तीन घंटे भी नहीं बैठ पा रहे हैं। दो घंटे होते ही पर्चा छोड़कर निकल रहे हैं। इतना ही नहीं कई ऐसे भी हैं जो उत्तरपुस्तिका में सिर्फ पांच से छह पन्ने ही भर पा रहे हैं। पर्यवेक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि परीक्षा हाल में कई परीक्षार्थी लिखने के दौरान बार-बार हाथ मसलते या दबाते नजर आते हैं। उत्तरपुस्तिका के दायें और बांये ओर स्केल से लकीर खींचकर बीच में लिखते हैं जो बिल्कुल गलत है। पूर्व परीक्षा नियंत्रक डा.प्रवीण पांडेय का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से यह स्थिति बनी है। दरसल कोरोना के दौरान घर में पर्चा हल करने और आनलाइन शिक्षा के कारण छात्र थोड़े आलसी हुए हैं। कक्षा में उपस्थिति कम होने के कारण लिखने की प्रवृत्ति कम हुई। मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से भी इसका असर पड़ा है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में दिक्कत होगी। पिछले साल उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में इसका पता चला था। सेमेस्टर परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संचालित है। परीक्षा में लिखने की प्रवृत्ति को लेकर बात सामने आई है। परीक्षार्थियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। सही उत्तर और उचित शब्द संख्या में ना होने पर परिणाम पर असर पड़ेगा।

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